हल्द्वानी। अनुशासित पार्टी होने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी का अनुशासन इस समय कुमाऊं में चार खंडों में बंट गया है। टिकट बंटवारे को लेकर आए भूचाल के बाद भाजपा के सांगठनिक 10 जिलों में करीब ढाई लाख प्राथमिक सदस्य अलग-थलग पड़े हैं। बाकी कार्यकर्ताओं ने भी अपने-अपने नेताओं के साथ मोर्चेबंदी कर रखी है। दो संसदीय सीटों में हमेशा एक रहने वाले यह कार्यकर्ता इस वक्त बचदा, भगतदा, सज्जन लाल और चनर राम के साथ एक-दूजे से दूर हैं। आंतरिक लोकतंत्र वाली पार्टी में विरोधी खेमा यह मान रहा है कि हमारा सम्मान नहीं हुआ और जिसके नाम पर मुहर लगी है, वह बगैर सीनियर नेताओं के प्रचार में लगे हैं।
कुमाऊं में संगठन के लिहाज से भाजपा ने नैनीताल, हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर, अल्मोड़ा, रानीखेत, चंपावत, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और डीडीहाट को जिला घोषित किया है। इन जिलों में पार्टी ने समाज के अलग-अलग वर्गों के 6 मोर्चे और 26 प्रकोष्ठ बनाए हैं। जिनमें करीब ढाई लाख ऐसे कार्यकर्ता हैं जिन्होंने पांच रुपये के स्टांप पर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ले रखी है। इसके अलावा हजारों अन्य कार्यकर्ता अलग से हैं। इन्हीं कार्यकर्ताओं के बूते पार्टी की बुनियाद टिकी है, मगर इस समय कुमाऊं में नैनीताल-ऊधमसिंह नगर और अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ संसदीय सीट में सारे कार्यकर्ता अपने-अपने नेताओं के साथ खड़े हैं। इसके चलते पार्टी के घोषित प्रत्याशी भगत सिंह कोश्यारी और अजय टम्टा के प्रचार में संख्याबल भी घट गया है।
विरोधी खेमे के सूत्रधार बची सिंह रावत नैनीताल सीट में टिकट नहीं दिए जाने से चुनाव मैदान से ‘गायब’ हैं तो पार्टी का एक बड़ा धड़ा उनके साथ खड़ा हो गया है। इनमें प्रांतीय नेता और कुछ विधायक भी शामिल हैं। भगत दा के पुराने विरोधियों के भी बचदा के करीब आने के बाद इस खेमे का पलड़ा भारी हुआ है। इसके चलते पार्टी का एक गुट भगतदा के साथ प्रचार कर रहा है तो दूसरा बची सिंह रावत के साथ हाईकमान से यह उम्मीद लगा रहा है कि अन्याय नहीं इंसाफ होना चाहिए। अल्मोड़ा सीट पर अजय टम्टा को टिकट देने के बाद सज्जन लाल टम्टा ने पार्टी से इस्तीफा देकर खुली बगावत कर डाली तो कार्यकर्ताओं का एक हिस्सा उनके समर्थन में आ गया। अब यही तेवर चनर राम ने भी अपनाते हुए कार्यकताओं के एक हिस्से को अपनी तरफ खींच लिया है। विरोधी खेमे के तेवरों से यह साफ है कि कोई भी बैकफुट पर आने को तैयार नहीं है। ऐसे में खंड-खंडों में बिखरी ‘कमल’ की पंखुड़ियां अगर एक नहीं हुई तो इस कलह के बीच मैदान जीत पाना मुश्किल होगा यह तय है।
यह हैं भाजपा के मोर्चे
भाजयुमो, महिला, किसान, अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पयंख्यक।
इतने प्रकोष्ठ कुमाऊं में सक्रिय
पंचायत, स्थानीय निकाय, सहकारिता, मीडिया, प्रकाशन, परिवहन, होटल एवं कैटरिंग, प्रबुद्ध, उच्च शिक्षा, निर्बल, प्रवासी, खेल, सीए, विधि, निर्माण, शिक्षक, श्रम, लघु उद्योग, व्यापार, पिछड़ा वर्ग, कर्मचारी, गोवंश, सैनिक, आईटी, चिकित्सा, संस्कृति, संचार।
(इसके अलावा पार्टी के आनुसांगिक संगठन विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल एबीवीपी और हिजामं भी हैं।)