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संघर्ष और सहानुभूति ने कैड़ा को पहुंचाया विधानसभा

अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल Updated Sun, 12 Mar 2017 12:44 AM IST
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 वर्ष 2012 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव हारने और इस बार कांग्रेस से बगावत कर भीमताल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरने वाले निर्दलीय राम सिंह कैड़ा की जीत में ओखलकांडा ब्लाक के मतदाताओं की अहम भूमिका रही। यही नहीं पिछला चुनाव हारने के बाद से ही विधानसभा क्षेत्र में काश्तकारों, नौजवानों और बेरोजगारों के हितों के लिए किए गए प्रयास और कैड़ा के प्रति मतदाताओं में उपजी सहानुभूति ने भी कैड़ा के विधानसभा में जाने का रास्ता साफ कर दिया। 
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वर्ष 2012 में कैड़ा ने कांग्रेस के टिकट पर भीमताल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था तब भाजपा के दान सिंह भंडारी पहले, बसपा के मोहन पाल दूसरे स्थान पर रहे थे जबकि कैड़ा को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था। इस चुनाव में कैड़ा की हार का बड़ा कारण उनके गृह ब्लाक ओखलकांडा से ही उन्हें कम वोटों का मिलना था, तब यहां भाजपा और कांग्रेस को खूब वोट मिले थे। इस चुनाव में करारी पराजय झेलने के बावजूद कैड़ा ने हिम्मत नहीं हारी। हार के कारणों की समीक्षा कर कैड़ा ने हार के दूसरे दिन से ही वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू की और पूरे पांच साल तक भीमताल, ओखलकांडा, रामगढ़ और धारी ब्लाक के लोगों के सुख-दुख में शामिल होते रहे। चूंकि ओखलकांडा ब्लाक में मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक थी लिहाजा कैड़ा ने बीते पांच साल तक ओखलकांडा ब्लाक पर अधिक फोकस रखा। कैड़ा समय-समय पर क्षेत्र के काश्तकारों, बेरोजगारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे और मुख्यमंत्री समेत अन्य मंत्रियों से मिलकर जनसमस्याएं हल कराने के लिए प्रयासरत रहे।
कैड़ा को उम्मीद थी कि इस बार भी कांग्रेस उन्हें टिकट देगी लेकिन अंतिम समय में उनका टिकट कट गया। इस दौरान कैड़ा के भाजपा में शामिल होने की भी खूब चर्चा हुई। भाजपा के एक बड़े नेता की ओर से इस संबंध में प्रयास भी हुए लेकिन कैड़ा ने भाजपा में शामिल होने के बजाए नामांकन से चंद रोज पहले विनायक (भीमताल) में अपने समर्थकों के साथ बैठक कर निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।
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नामांकन के बाद सीमित संसाधनों के बावजूद कैड़ा के समर्थक ही उनके लिए स्टार प्रचारक साबित हुए। समर्थकों ने रातों रात उनके चुनाव चिन्ह अंगूठी को सोशल मीडिया समेत अन्य माध्यमों से घर-घर तक पहुंचाया। चूंकि कैड़ा ने पांच साल तक ओखलकांडा में फोकस किया था, लिहाजा चुनाव से ऐन पहले ओखलकांडा में कैड़ा के प्रति क्षेत्रवाद की ऐसी लहर उठी कि इस ब्लाक में मतदान के दिन कई बूथों पर कांग्रेस और भाजपा को एजेंट तक नसीब नहीं हुए। 

हर राउंड में कैड़ा रहे आगे
 यह कैड़ा के समर्थकों की मेहनत का ही परिणाम था कि विधानसभा क्षेत्र का कोई भी बूथ ऐसा नहीं था जहां निर्दलीय होने के बावजूद कैड़ा को वोट न पड़ा हो। ओखलकांडा ब्लाक के अधिकांश बूथों में कैड़ा पहले, भाजपा दूसरे और कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही जबकि धारी ब्लाक के बूथों में बसपा पहले, कैड़ा दूसरे और कांग्रेस तीसरे, रामगढ़ में कांग्रेस पहले, भाजपा दूसरे और बसपा तीसरे तथा भीमताल नगर और ग्रामीण क्षेत्रों के बूथों में भाजपा पहले, कांग्रेस दूसरे और बसपा तीसरे स्थान नजर आई। ओखलकांडा ब्लाक से मिली लीड ने मतगणना के हर राउंड में कैड़ा को अन्य प्रत्याशियों से आगे रखा।


दूरस्थ गांवों तक दिखी नोटा के प्रति जागरूकता
 इस बार चुनाव में भीमताल विधानसभा क्षेत्र के दूरस्थ गांवों तक नोटा के प्रति लोगों में जागरूकता देखी गई। मतगणना के आंकड़ों के मुताबिक भीमताल विधानसभा क्षेत्र के कुल 151 पोलिंग बूथों में से 148 बूथों में कुल 963 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। इसमें दो पोस्टल बैलेट भी शामिल हैं। इससे विधानसभा के दूरस्थ गांवों में रह रहे मतदाताओं में नेताओं के प्रति अविश्वास के साथ साथ क्षेत्र का विकास न होने की कसक का अंदाजा लगाया जा सकता है। 


पांच वोटों से चार भाजपा को और एक बसपा को
ओखलकांडा ब्लाक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय कौंता में 370 मतदाताओं में से चुनाव में केवल 5 मतदाताओं ने ही मताधिकार का प्रयोग किया था। मतगणना के आंकड़ों के मुताबिक इनमें से चार मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में और एक ने बसपा के पक्ष में वोट डाला। क्षेत्र में जनसमस्याएं हल न होने से क्षुब्ध ग्रामीणों ने यहां मताधिकार का प्रयोग नहीं किया था।
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