पौड़ी। जिला मुख्यालय पौड़ी में रामलीला समिति की ओर से होली मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें होल्यारों ने कविता व होली गीतों से माहौल को सराबोर किया।
होली मिलन कार्यक्रम का शुभारंभ रामलीला समिति के अध्यक्ष उमाचरण बड़थ्वाल ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि होली के पर्व को शहरवासी शहीद सैनिकों को समर्पित करेंगे। होली के दिन शहर में होल्यारों की टोली नहीं निकाली जाएगी। सरल अंदाज में ही पर्व को मनाया जाएगा। कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी व होल्यार गौरीशंकर थपलियाल ने केले बांधी चीर, हो रघुनंदन राजा, होला आई रही, हो, हो, हो मोहन गिरधारी आदि होली गीतों के गाकर माहौल को होली के रंगों में भिगो दिया। कार्यक्रम में काव्य पाठ का शुभारंभ कवि डा. मदन मोहन नौडियाल ने सरस्वती वंदना से किया। युवा कवि स्वप्निल धस्माना ने वो आएंगे, सुलह होगी, हम दरकिनार कर दिए जाएंगे। नवोदित कवयित्री डा. रितु ने रोज आया करो, फिर तुम जाया न करो, युवा कवि कमलेश मिश्रा ने मैं जहां भी गया, वहां दोहरे किरदार मिले, शेर की खाल में सब मक्कार मिले कविता पाठ पर जमकर वाहवाही बटोरी। गढ़वाली गीतकार प्रमेंद्र नेगी मुखड़ी हैंसदी, दुन्या इन च भुला, भरोंसु न करि जै-कैकु, पंकज कुमार गीत ने एक बार मुझे, उससे मिला दे ए जिंदगी। कवि अनूप चौधरी ने बेफिक्र देश ये जिनके दम सोता था, आज तिरंगे झंडे में कुछ वो ही सैनिक सोए हैं। गढ़ कवि गणेश खुगशाल गणी ने न चणा होन लोग, अर एका पकड्यां होन हैंका हाथ, हाथों मा धर्या होन हाथ गीत प्रस्तुत किया। कवि वीरेंद्र खंकरियाल ने पहाड़ पर समर्पित कविता का पाठ किया। मनोज रावत अंजुल ने शहीदों के परिवार की संवेदना को उकेरती अपने गढ़वाली गीत मां अलझि, बाला का सवाल मा कि बाबा नि ए ऐंसु की बग्वाल मा... की प्रस्तुति से उपस्थित श्रोताओं की आंखों को नम कर दिया। कार्यक्रम में विमल नेगी, वीरेंद्र पंवार व अद्वैत बहुगुणा ने भी काव्य पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन विजय कपरवाण ने किया।
होल्यारों को पुलिस ने रोका
पौड़ी। जिला मुख्यालय पौड़ी में राठ क्षेत्र के मरोड़ा गांव से होल्यार होली खेलने आए थे। उन्हें पुलिस ने आचार संहिता का हवाला देकर रोक लिया। इसे संस्कृति प्रेमियों ने पर्व पर पहरा करार दिया। मरोड़ा से आए होल्यार अनमोल रावत, योगेंद्र बिष्ट, राहुल, मंदीप व सुमित आदि शामिल रहे।