पौड़ी। शिक्षा विभाग के कारनामे भी अजब गजब हैं। एक ही परिसर में जहां तीन सरकारी प्राथमिक विद्यालय चल रहे हैं। वहीं इसी परिसर में चल रहे जर्जर हाल एक अन्य स्कूल के बंद होने के बाद विभाग को उसके पुनर्निर्माण की याद आई है। स्कूल के बंद होने के बाद विभाग की ओर से 12.63 लाख रुपये जारी किए गए हैं। वहीं इससे भी हैरान करने वाली बात यह है कि स्कूल में बच्चों की संख्या भले घटती जा रही है, लेकिन यहां एक स्कूल में दो और दूसरे में चार प्रधानाध्यापिकाएं कार्यरत हैं।
मंडल मुख्यालय में राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय नंबर पांच वर्ष 1994 का विद्यालय है। स्कूल में वर्तमान में 56 बच्चे अध्ययनरत हैं, लेकिन विद्यालय का भवन जर्जर हाल बना है। इसी विद्यालय परिसर में प्राथमिक विद्यालय नंबर छह, प्राथमिक विद्यालय नंबर सात और प्राथमिक विद्यालय नंबर नौ भी हैं। इसमें वार्ड नंबर छह का लगभग दो साल पहले प्राथमिक विद्यालय नंबर पांच में विलय किए जाने से यह स्कूल बंद हो चुका है, लेकिन सर्व शिक्षा अभियान के तहत इस बंद विद्यालय के पुनर्निर्माण के लिए 12.63 लाख रुपये जारी किए गए हैं। जबकि प्राथमिक विद्यालय नंबर पांच, प्राथमिक विद्यालय नंबर सात और प्राथमिक विद्यालय नंबर नौ अब भी एक ही परिसर में चल रहे हैं। इसमें प्राथमिक विद्यालय नंबर सात में 17 एवं प्राथमिक विद्यालय नंबर नौ में 12 बच्चे पढ़ रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय नंबर पांच में दो और एक अन्य 13 नंबर स्कूल में चार प्रधानाध्यापिकाएं हैं, जबकि आरटीई में स्पष्ट किया गया है कि सौ से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों में प्रधानाध्यापक नहीं होंगे।
प्राथमिक विद्यालय नंबर छह के पुनर्निर्माण के लिए पैसा तब मिला, जब यह स्कूल बंद हो गया। एक ही परिसर में तीन स्कूलों के मसले पर कुछ तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। इसके लिए समाधान ढूंढ रहे हैं। -केएस रावत, डीईओ बेसिक पौड़ी।