पिथौरागढ़। मॉरीशस के तीन युवाओं का सपना आखिरकार पूरा हो गया। पहाड़ की हसीन वादियों को केवल फिल्मों में देखने वाले इन युवाओं ने जब पहली बार पहाड़ के दर्शन किए, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जीभर के पहाड़ की तस्वीरें खींची। पहाड़ की दीपावली भी देख ली और माथे पर भैयादूज का तिलक भी लगा लिया। ये सब गेख वे यहां की संस्कृति से अभिभूत थे।
जिला मुख्यालय के निकट के तड़ीगांव के ग्राम प्रधान हयात चंद के बेटे गौरव चंद ग्वालियर स्थित लक्ष्मी बाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा विश्वविद्यालय से चार वर्षीय बीपीएड (शारीरिक शिक्षा) का प्रशिक्षण ले रहे हैं। उनके साथ विदेशी मूल के बहुत सारे युवा भी बीपीएड की ट्रेनिंग ले रहे हैं। इस बार दीपावली की छुट्टियां मनाने के लिए गौरव अपने साथ मॉरीशस के रहने वाले प्रवेश, सरवन और रंगेन को भी यहां लेकर आए हैं। तीनों यहां आकर बेहद खुश हैं।
उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ की हसीन वादियां और यहां की संस्कृति से वे बहुत प्रभावित हुए हैं। यहां के लोगों का स्वभाव भी बहुत मिलनसार है। पहली बार पहाड़ की दीपावली देखकर उन्होंने बताया कि मॉरीशस में भी दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है। लेकिन ऊंची पहाड़ी से अतिशबाजी का नजारा देखने का आनंद ही कुछ और है। पूरा शहर रोशनी में डूबा नजर आता है। उन्हें यहां पहली बार भट की चुड़कानी और मडवे की रोटी खाने को मिली।
उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ और मॉरीशस के तापमान में बहुत अंतर है। मॉरीशस में जाड़ों का न्यूनतम तापमान 15 डिग्री रहता है। लेकिन यहां बहुत ठंड हैं। तीनों ने बताया कि मॉरीशस में शारीरिक शिक्षा से जुड़ी डिग्री की बहुत डिमांड है। यहां से चार वर्षीय डिग्री लेने के बाद उन्हें मॉरीशस में इसी विषय में एक साल का डिप्लोमा भी लेना होगा। उसके बाद उन्हें अच्छी नौकरी मिल जाएगी।
मॉरीशस के ये तीनों छात्र शुक्रवार को ग्वालियर को लौट जाएंगे। लेकिन यहां की याद को ताजा रखने के लिए उन्होंने बहुत सारे फोटोग्राफ खींच लिए हैं। तीनों ने दोबारा यहां आने की इच्छा जाहिर की है। तीन साल भारत में गुजार चुके तीनों युवाओं ने टूटी-फूटी हिंदी भी सीख ली है।