पिथौरागढ़। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने मंगलवार को गंगोलीहाट में जनसभा को संबोधित करते हुए अल्मोड़ा और बागेश्वर की सीमा से सटे गणाईगंगोली को तहसील का दर्जा देने की घोषणा की है। यदि वास्तव में ऐसा होता है तो गणाईगंगोली सूबे की ऐसी पहली तहसील होगी, जो कि एक अन्य विकासखंड के अधीन होगी। इस पेचीदगी से यह मामला फंसता नजर आ रहा है।
गणाईगंगोली कीलगभग 40 ग्राम पंचायतें वर्तमान में गंगोलीहाट विकासखंड में शामिल हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल होने पर एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो जाएगी। वर्तमान में गणाईगंगोली जिले के सबसे बड़े विकासखंड गंगोलीहाट के अंतर्गत आता है। तहसील बनने के बाद गणाईगंगोली प्रशासनिक दृष्टि से एक अलग इकाई बन जाएगी। तहसील कार्यालय के साथ ही वहां एसडीएम कार्यालय भी स्थापित होगा लेकिन गणाईगंगोली का विकासखंड गंगोलीहाट ही रहेगा।
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गणाईगंगोली से गंगोलीहाट की दूरी 40 किलोमीटर है। बात गणाईगंगोली के अल्मोड़ा जिले से लगे सेराघाट की करें तो उसकी दूरी गंगोलीहाट से 50 किमी, बनकोट की दूरी 55 किमी, बागेश्वर की सीमा से लगे बाजड़ की की दूरी 65 किमी है। इन इलाकों के लोगों को तहसील और एसडीएम कोर्ट की सुविधा तो घर के नजदीक मिल जाएगी लेकिन ब्लाक संबंधी काम के लिए गंगोलीहाट की दौड़ लगानी पड़ेगी। इस समस्या के निदान के लिए सरकार को गणाईगंगोली को ब्लाक का भी दर्जा देना पड़ेगा। ब्लाक गठन के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी चाहिए होती है। इसमें लंबा समय लगेगा। इतना तय है कि यह मामला स्थानीय लोगों के लिए तो तमाम पेचीदगियां खड़ी करेगा ही, सरकार के लिए भी समस्या खड़ी करेगा और गणाईगंगोली तहसील के गठन में एक रोड़ा साबित होगा। अब इस मसले का तोड़ तहसील की घोषणा कराने वाले विधायक नारायण राम आर्य और सरकार कैसे निकालती है, यह देखना दिलचस्प होगा।