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तीन दिन तक भूखे-प्यासे जंगल में भटकते रहे दो बुजुर्ग

Pithoragarh Updated Sat, 09 Feb 2013 05:31 AM IST
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डीडीहाट। भूख और प्यास शरीर को तोड़ देती है। दिमाग सुन्न हो जाता है। हाथ-पैर कांपने लगते हैं। इसके बावजूद 70 और 75 साल के दो बुजुर्ग तीन दिन तक जंगल में भूखे-प्यासे भटकने के बाद बच जाते हैं तो इसे आश्चर्य ही कहेंगे। सोबन सिंह (75) और लक्ष्मण सिंह (70) ने भी गंधूरा के जंगलों में यही जीजिवीषा दिखाई। तेजपत्ता खाकर, गड्ढों में जमा बरसाती पानी पीकर किसी तरह उन्होंने अपनी जान बचाई। जंगली जानवरों से बचने के लिए रात पत्थरों के नीचे छुपकर काटी और दिन भर बाहर निकलने के लिए जंगल की खाक छानते रहे। बृहस्पतिवार को एसएसबी और रेग्युलर पुलिस की संयुक्त टीम ने दोनों को खोज निकाला।
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बता दें कि चार फरवरी को मुकुट ग्राम पंचायत के बलवंत सिंह पुत्र शेर सिंह की बारात सीढ़ी गांव गई थी। बारात विदा होने से पहले दूल्हे के दादा सोबन सिंह और एक अन्य बाराती लक्ष्मण सिंह गंधूरा के जंगल में भटक गए। देर शाम तक बाराती-घराती सब उन्हें तलाशते रहे लेकिन कुछ पता नहीं चला। बाद में परिजनों ने राजस्व पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। एसडीएम बीएस फोनिया ने बताया कि राजस्व, रेग्युलर पुलिस और एसएसबी ने बृहस्पतिवार को दोनों बुजुर्गों को खोज निकाला।
तीन दिन तक भूखे रहने के कारण दोनों की हालत काफी खराब है। उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया गया है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. हरीश रावत ने बताया कि भूखे, प्यासे रहने से दोनों के शरीर में पानी की कमी हो गई है। लक्ष्मण सिंह का स्वास्थ्य में अधिक खराब है। सोबन सिंह ने बताया कि वह गंधूरा के जंगलों से बाहर निकालने का रास्ता खोजते रहे। जिंदा रहने के लिए तेजपात खाया।
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