पिथौरागढ़। हिमालयी सुनामी ने सीमांत के लोगों को कहीं का नहीं छोड़ा है। लोगों की जिंदगी भर की कमाई बाढ़ की भेंट चढ़ गई है। एक प्रकार से आपदा पीड़ित खून के आंसू रो रहे हैं। सरकार का राहत देने का प्रयास शुरुआत में ही ढीला है।
12 दिन पूर्व नदियों में बाढ़ आने से मदकोट, बलुवाकोट, तवाघाट, झूलाघाट, तेजम (सोबला) समेत तमाम कस्बों और गांवों का नक्शा बदल दिया है, सोबला कस्बे का नामोनिशान मिट गया है। मदकोट में सड़क ध्वस्त होने के साथ ही सात मकान/दुकान गोरी नदी में समा गए हैं। प्रभावित लोगों ने अन्यत्र शरण ले रखी है। बुधवार को गोरी नदी के इस पार से तबाह हुए मदकोट को निहारती दो महिलाओं से बात की गई तो उन्होंने अपना नाम गंगोत्री देवी और हीरा देवी बताते हुए कहा कि उन लोगों के मकान गोरी नदी में समा गए हैं।
रोते-रोते कहती हैं कि जिंदगी भर की कमाई बाढ़ की भेंट चढ़ गई है। सरकार उसकी भरपाई करेगी नहीं। वह लोग कैसे अपना परिवार पालें यह समस्या उनके सामने पैदा हो गई है। अब तक उनका दुख कम करने की कोशिश किसी ने नहीं की। मदकोट इलाके में राहत, बचाव के काम में लगी आइस और मोनाल संस्था के लोगों ने गोरीछाल की स्थिति भयावह बताई है।