पिथौरागढ़। इंडियन जियोलॉजिकल कांग्रेस के तहत सोमवार से यहां राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में उत्तराखंड के भूविज्ञान पर दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हो गई है। मुख्य वक्ता भूवैज्ञानिक पद्मश्री डा. केएस वल्दिया ने कहा कि प्रकृति का अत्यधिक दोहन होने से धरती का तापमान बढ़ रहा है। इसी से भूकटाव की घटनाएं बढ़ रही हैं।
डा. वल्दिया ने कहा कि जमीन का क्षरण बढ़ने से नदियों का प्रवाह तेज हो रहा है। नदियों के प्रवाह को बाधा पहुंचाने की लगातार कोशिश हो रही है। जंगलों का तेजी से कटान हो रहा है। इसी कारण प्राकृतिक प्रकोप की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय की रक्षा के लिए सभी को सजग होने की जरूरत है। तभी देश की रक्षा होगी।
अध्यक्षीय भाषण में इंडियन जियोलॉजिकल कांग्रेस के अधिशासी अध्यक्ष प्रो. ओपी वर्मा ने कहा कि उत्तराखंड हिमालय में अपार खनिज संपदा है। यदि न्यायोचित तरीके से इनका उपयोग किया जाए तो हिमालयी क्षेत्र का व्यापक विकास हो सकता है। प्राचार्य डा. डीएस पांगती ने कहा कि कार्यशाला से समाज, छात्र, छात्राओं को नई जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन से प्रकृति के संरक्षण की चेतना का विकास होगा। हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. बीसी तिवारी ने जून में आई आपदा के कारणों पर रोशनी डाली। महाविद्यालय के भूविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में डा. राम अवतार सिंह की पुस्तक भूस्खल एवं पर्यावरण ह्रास पुस्तक का विमोचन किया गया। संचालन डा. अजय शुक्ल ने किया। इस मौके पर डा. नीलांबर पुनेठा, डा. जीत सिंह ज्याला, डा. पीएन चौबे, प्रो. आरसी पांडे आदि मौजूद थे।