ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । समाज में नारी सशक्तीकरण की बात अक्सर सभी लोग करते हैं लेकिन इस बात को धरातल पर कोई लागू नहीं करता। अमर उजाला की ओर से अपराजिता की नई पहल ने नारी सशक्तीकरण को नई दिशा देने काम किया है। यह बात समाज सेवी रोमा सहगल ने अमर उजाला के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स महाअभियान के दौरान कही। शुक्रवार को मिशन अपराजिता के तहत आवास विकास स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ समाजसेवी रोमा सहगल ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि नारी सशक्तीकरण की जो अनुकरणीय परंपरा भारत में है वह कहीं और नहीं है।
उन्होेंने बताया कि भारत की संस्कृति को बचाने लिए खासकर महिलाओं को अपने बच्चों को संस्कार देने की आवश्यकता है। जब हर घर में बेटी संस्कारित होगी तभी नारी सशक्तीकरण का यह सपना साकार होगा। आज बेटियां काफी हद तक शिक्षित हो गई हैं लेकिन शिक्षा के साथ ही बेटियों को सांस्कारिक होना भी बहुत जरूरी है। नारी सम्मान की जो भारतीय परंपरा रही है, उसको आगे बढ़ाने में महिला अहम भूमिका निभा सकती है। इसके लिए महिलाओं को जागरूक होकर औरों को भी जागरूक करना चाहिए।
वर्तमान में महिलाओं के प्रति बढ़ रहे अपराध पाश्चात्य संस्कृति का हावी होना भी एक कारण है। संस्कृति के अभाव में युवा अपना रास्ता भटक रहे हैं। इसका खामियाजा अक्सर महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है।
- साक्षी रावत गृहणी
जिस घर में लड़की संस्कारवान होंगी वह एक घर ही नहीं दो घरों को रोशन करेगी। बच्चों को शिक्षा के साथ ही संस्कारों का आदान प्रदान करना जरूरी है। जो बच्चे संस्कारित होंगे वह स्वयं ही अच्छे रास्ते पर चलकर सफल होंगे।
- समिष्ठा पटेल समाज सेविका
एक संस्कारित महिला मां बहन बेटी और पत्नी के रूप में अपना धर्म निभाती है। लेकिन अभी भी जागरुकता के अभाव से कई महिलाएं जुर्म की शिकार हो जाती हैं। इसके लिए महिलाओं को जागरूक होना बहुत जरूरी है।
- पूनम अरोड़ा गृहणी
परिवार में बेटा हो या बेटी दोनों को संस्कारित होने चाहिए। संस्कारित बच्चे ही आगे चलकर लोगों को सही रास्ते का अनुशरण कराने में सफल होते हैं।
- रजनी शर्मा गृहणी