ब्यूरो/अमर उजाला, डोईवाला। स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी (एसआरएचयू) में विज्ञान और अध्यात्म के माध्यम से सुख, शांति और समृद्धि रूपांतरण विषय दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन शुक्रवार से शुरू हो गया। प्रणव मुखर्जी फाउंडेशन और सेंटर फारॅ रिसर्च इन रूरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट की ओर से आयोजित सम्मेलन का शुभारंभ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने संयुक्त रूप से डॉ. स्वामीराम के चित्र के समक्ष दीप जलाकर किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में अध्यात्म और विज्ञान के तालमेल से ही संपन्नता की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था है। बावजूद इसके ग्लोबल हैप्पीनेस इंडेक्स में देश का 133वां और वर्ल्ड पीस इंडेक्स में 137वां स्थान है, जो चिंताजनक है। पूरी दुनिया में योग भारत की देन है। सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे पूर्व केंद्रीय और सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि सुख, शांति और संपन्नता हमारे अंदर समाहित हैं। केवल इसको समझना और खोजना होगा।
उन्होंने कहा कि नैतिकता और रचनात्मकता के आधार पर सुख और शांति के रूपांतरण होना चाहिए। इससे पहले कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। सम्मेलन में ऋषिकेश मेयर अनिता ममगाईं, हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. हेमचंद पांडे, दून विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. सीएस नौटियाल, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. यूएस रावत, एसआरएचयू प्रति कुलपति डॉ. विजेंद्र चौहान, डॉ. सुनील सैनी, साधना मिश्रा, रजिस्ट्रार नलिन भटनागर आदि मौजूद थे।
मूर्तियों को किया अनावरण
डोईवाला। हिमालयन आयुर्विज्ञान संस्थान परिसर में भारतीय चिकित्सा विज्ञान के जनक, आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ चरक संहिता के रचयिता महर्षि चरक और शल्य चिकित्सा के जनक महर्षि सुश्रुत की नवनिर्मित मूर्ति का अनावरण पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी, गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पांड्या, स्वामीराम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने संयुक्त रूप से किया।