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हाईकोर्ट के आदेश पर गरजी अवैध निर्माण पर जेसीबी

अमर उजाला ब्यूरो रुड़की Updated Tue, 11 Apr 2017 10:33 PM IST
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हाईकोर्ट के आदेश पर तहसील प्रशासन की टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में तालाब की भूमि पर किए गए अवैध निर्माण (सीसी सड़क) को ध्वस्त करवा दिया। इस दौरान टीम में शामिल अधिकारियों और कर्मियों को विरोध भी झेलना पड़ा, लेकिन सख्ती पर किसी कब्जेदार की नहीं चल पाई।

तहसील प्रशासन की ओर से बेलड़ा गांव के तालाब की भूमि पर हुए अवैध निर्माण को हटाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने इसे (सीसी सड़क) हटाने के आदेश जारी किए थे। इस पर तहसील प्रशासन की ओर से कार्रवाई की थी, लेकिन याचिकाकर्ता प्रशासन की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं था। उसने हाईकोर्ट में पूरा अतिक्रमण नहीं तोड़ने की याचिका फिर दायर की थी। इस पर हाईकोर्ट ने फिर से पूरा अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी किए। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने फिर से अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी किए थे। इस पर मंगलवार को एएसडीएम गोपाल सिंह चौहान के नेतृत्व में पुलिस एवं प्रशासन की टीम अतिक्रमण हटाने पहुंच गई। एएसडीएम के निर्देश पर जेसीबी से तालाब की भूमि हटाने के निर्देश दिए गए तो कुछ लोग विरोध करने लगे, लेकिन एएसडीएम ने सख्ती दिखाई तो विरोध करने वाले शांत हो गए। कई घंटे की मशक्कत के बाद अवैध (सीसी सड़क) निर्माण तोड़ दिया। इस मौके पर कानूनगो राजेश त्यागी एवं भारी पुलिस बल मौजूद रहा।
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यहां भी ऐसी कार्रवाई की दरकार
रुड़की। हाईकोर्ट के आदेश पर प्रशासन की ओर से बेलड़ा के तालाब को तो कब्जा मुक्त करा दिया है, लेकिन यहां सुप्रीम कोर्ट एवं केंद्र सरकार के आदेशों के बावजूद गांव-गांव एवं कस्बों में ऐसी स्थिति बनी हुई है, जहां तालाबों की भूमि पर कहीं क्रंकीट के भवन खड़े हुह हैं तो कहीं माफिया तालाबों की भूमि को पाटकर कब्जा कर चुके हैं।


कस्बे के आधा दर्जन तालाबों पर कब्जा
कस्बा के करीब आधा दर्जन तालाबों पर सालों से अवैध कब्जा है, लेकिन शिकयत पर भी प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं की तो समाजसेवी केपी सिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने सभी तालाबों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की मांग हाईकोर्ट की ओर से कर रखी है। इस पर हाईकोर्ट की ओर से आदेश किए जाने पर प्रशासन ने नोटिस भी जारी किए हैं, लेकिन नोटिस से आगे प्रशासन के अधिकारी नहीं बढ़ रहे हैं। इससे भू-माफिया के हौसले बुलंद हैं।


सांसद आदर्श गांव का तालाब भी अतिक्रमण की भेंट
 गोवर्धनपुर गांव को सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत लगभग ढाई वर्ष पहले गोद लिया था। गांव में होने वाले विकास कार्यों में गांव के मुख्य तालाब की साफ-सफाई भी होनी थी, लेकिन ढाई वर्ष गुजरने के बाद भी गांव के मुख्य तालाब की साफ-सफाई नहीं हो पाई है। उलटे तालाब पर गांव के कुछ ग्रामीणों ने कब्जा कर लिया है।

सात तालाबों में से बचे महज तीन  
पालिका के अभिलेखों में दर्ज सात तालाबों में से कुल तीन तालाब शेष बचे हैं। वैसे पुराने समय में नगर में 15 तालाब थे। जिनमें से अधिकांश पर लोगों ने कब्जे कर लिए हैं। इन पर मकान बने हुए हैं। तालाबों को सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक संपत्ति घोषित किया हुआ है। बावजूद इसके तालाब कब्जाने का खेल जारी है। नगर के ईदगाह रोड पर बने तालाब का रकबा पहले के मुकाबले कम हो गया है। हाईवे की ओर के तालाब के हिस्से पर मिट्टी का भराव कर पाट दिया गया और उस पर निर्माण कर लिया गया। आबादी से बाहर स्थित तालाबों को लोगों ने अपने खेतों में मिला लिया। पिछले काफी समय से तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए कोई प्रयास पालिका या तहसील स्तर पर नहीं किया गया है।

278 तालाबों की स्थिति दयनीय
 तहसील क्षेत्र में छोटे बड़े कुल मिलाकर 278 तालाब हैं, लेकिन इनकी स्थित बड़ी दयनीय है। कस्बे के साथ-साथ अन्य कई गांव में तो स्थित यह है कि अतिक्रमण के चलते मौके पर तालाब की भूमि तक नहीं बची है, जबकि इन तालाबों में शायद ही ऐसा कोई तालाब बचा हो, जिस पर थोड़ा या अधिक अतिक्रमण न हुआ हो। पिछले एक साल में जहां इन तालाबों में से पांच पर सौंदर्यीकरण का काम करा चुका है, लेकिन सौंदर्यीकरण भी धरातल पर नजर नजर नहीं आ रहा है।

ब्लॉक प्रशासन के दावों से अलग है हकीकत
ब्लॉक प्रशासन की ओर से भी मनरेगा से तालाबों को बचाने एवं नए तालाबों को बनाने के नाम पर सरकारी पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है। ब्लॉक अधिकारियों की ओर से हर साल मनरेगा से करोड़ों रुपये के नए तालाबों को बनाने एवं पुरानों को खुदवाने की प्रगति रिपोर्ट भेजी जा रही है, लेकिन ब्लॉक के दावों में जो आंकड़े हैं, वह धरातल पर कहीं नजर नहीं आते हैं। जिससे ब्लॉक प्रशासन की ओर से मनरेगा से करोड़ों रुपये जरूरत खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन वास्तव में तालाबों का अस्तित्व बचाने के लिए मनरेगा योजना कोई कारगर साबित नहीं हो रही है।

हाईकोर्ट के आदेश पर क्यों जागता है
प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट के आदेश पर ही कार्रवाई की जाती है। इससे पहले प्रशासन एवं उसके अधिकारी सोए रहते हैं। बेलड़ा गांव में तालाब की भूमि पर बनाई गई सड़क को तोड़ने का मामला भी कोई नया नहीं है। इससे पहले लखनौता में भी हाईकोर्ट की फटकार के बाद तहसील प्रशासन की ओर से तालाब की भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया था। इसके अलावा अकबरपुर ढांढेेकी गांव में से तालाब पर हुए अतिक्रमण को हटाने का केस भी हाईकोर्ट तक पहुंचा था। इसके अलावा शहर एवं कई गांवों में नालों-नालियों पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए भी हाईकोर्ट के आदेश पर ही कार्रवाई हुई।
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