नई टिहरी। नहरों के नाम पर हर वर्ष करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने वले लघु सिंचाई विभाग के पास क्षतिग्रस्त रत्नोगाड-क्यारी नहर की मरम्मत के लिए पैसा नहीं है। ग्रामीणों का कहना है, कि विभाग को कई बार प्रस्ताव देने पर भी नहर की मरम्मत नहीं की जा रही है।
रत्नोगाड से क्यारी के लिए बनाई गई सिंचाई नहर चार वर्ष पहले दैवीय आपदा और सड़क के मलबे से क्षतिग्रस्त हो गई थी। जिसकी मरम्मत नहीं होने से रत्नोगाड, बोरगांव, उजाड़गांव, अलेरू, पल्याण, कुनेर और क्यारी के ग्रामीणों की चार सौ नाली से अधिक सिंचित भूमि बंजर पड़ी है। इस क्षेत्र में काफी मात्रा में आलू, मटर और दूसरी नगदी फसलें भी होती हैं। क्षेत्र के रणवीर सिंह पंवार ने बताया कि ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य साधन खेती है। नहर से पानी मिलने पर काश्तकार नगदी फसल के साथ ही धान और गेहूं की फसल उगाकर आजीविका चला रहे थे। गदेरे में पर्याप्त पानी होने के बाद भी नहर की मरम्मत न होने से ग्रामीण खेती से वंचित हैं। लघु सिंचाई विभाग को कई बार प्रस्ताव देने पर भी विभाग लापरवाह बना हुआ है।
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रत्नोगाड-क्यारी एक किमी नहर की मरम्मत का प्रस्ताव मिला है। जिसे इस बार दैवीय आपदा के प्लान में रखा गया था। लेकिन आपदा मद में विभाग को पैसा नहीं मिला। बजट निर्गत होने पर ही क्षतिग्रस्त नहर का मरम्मत कार्य हो पाएगा। -भरत राम, एई लघु सिंचाई विभाग टिहरी।