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सिडकुल ने थामा तो चल पड़ा रोपवे

Tehri Updated Mon, 25 Feb 2013 05:31 AM IST
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नई टिहरी। टिपरी-मदननेगी रोप वे के संचालन की जिम्मेदारी सिडकुल ने थामी तो लोगों को राहत मिल गई। लोग सस्ते में अब कम दूरी तय कर अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं। रोपवे के दोबारा से संचालन शुरू होने के 24 दिनों में 2200 से अधिक लोग इसका लाभ उठा चुके हैं।
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टिहरी बांध की झील के उस पार बसे लोगों के कष्टों को देखते हुए वर्ष 2006-07 में भागीरथी विकास प्राधिकरण पे करीब 1.50 करोड़ की लागत से टिपरी-मदननेगी रोप-वे का निर्माण किया था। नवंबर 2008 मेें रोप-वे का संचालन पुनर्वास निदेशालय ने ऊषा ब्रको कंपनी के माध्यम से शुरू किया था। लेकिन तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए कंपनी ने रोप-वे का संचालन करने से हाथ खड़े कर दिए। 7 नवंबर को मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने सिडकुल को रोपवे संचालन की जिम्मेदारी सौंपी थी।

सिडकुल को भी हुआ फायदा
26 जनवरी को रोपवे का संचालन शुरू करने के बाद अब तक 24 दिनों में 2194 लोग रोपवे से आवागमन कर चुके है। इनमें 24 पर्यटक भी शामिल है। बांध प्रभावित ग्रामीणों को 10 रुपये तथा पर्यटकों को 150 रुपये आने जाने का किराया देना पड़ता है। पांच किग्रा से अधिक सामान ले जाने वाले व्यक्ति से अतिरिक्त किराया लिया जाता है। रोपवे संचालन से सिडकुल को अब तक 25,500 रुपये की आमदनी भी हुई है।
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इन्हें मिल रहा लाभ
रोप-वे संचालन से बांध प्रभावित प्रतापनगर के उपली रमोली, रौणद रमोली, ओण, भदूरा, रैका, उत्तरकाशी के गाजणा और जाखणीधार के धारमंडल व ढुंगमंदार पट्टी के लगभग 200 गांवों को लाभ मिल रहा है।

समय और पैसे की भी बचत
अब तक झील के उस पार के लोगों को पीपलडाली मार्ग से 40 किमी अतिरिक्त दूरी तय कर जिला मुख्यालय आना-जाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें 50-60 रुपये से अधिक बस किराया देना पड़ता था। साथ ही आवाजाही में डेढ़ से दो घंटे अतिरिक्त लगते थे। रोप वे के संचालन के बाद आरपार जाने में 10 मिनट लगते हैं। जबकि किराया भी केवल दस रुपये ही लगता है।

रविवार को छोड़कर अन्य दिनों में प्रात: 9 बजे से शाम 5 बजे तक रोपवे का संचालन किया जाता है। रविवार को मरम्मत इत्यादि का काम किया जाता है। -गणपति सिंह रावत क्षेत्रीय अधिकारी सिडकुल
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