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अब नए पाठ्यक्रम की सता रहे चिंता

Tehri Updated Fri, 19 Apr 2013 05:30 AM IST
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नई टिहरी। पहली बार प्राइवेट परीक्षा आयोजित कर रहे श्रीदेव सुमन एफिलिएटिंग विवि को नए सत्र की चिंता सताने लगी है। नए सत्र में विवि को अपना पाठ्यक्रम तैयार करना है। हालांकि अभी तक विवि में कार्य परिषद, विद्या परिषद और वित्त समिति गठित नहीं हो पाई है। इसके लिए विवि को लंबी प्रक्रिया से गुजरना है। कुलाधिपति, प्रदेश सरकार और विवि को इन पदों पर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योग्यता रखने वाले व्यक्तियों की तलाश करनी है। शिक्षाविदों की तलाश के लिए विवि ने अपने स्तर पर औपचारिकताएं पूरी कर दी है। अब गेंद कुलाधिपति और शासन के पाले में है। ईसी और विद्या परिषद के गठन को लेकर अब सबकी निगाहें राजभवन पर टिकी हैं।
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7 नवंबर 2011 में बादशाहीथौल चंबा में एफिलिएटिंग विवि अस्तित्व में आ गया था। सत्र 2012-13 में विवि को पहली बार प्राइवेट परीक्षा करने की जिम्मेदारी मिली है। नवसृजित विवि से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम तैयार न होेने पर इस सत्र में गढ़वाल विवि का ही पाठ्यक्रम एडोप्ट करना पड़ा। अब सत्र 2013-14 के लिए विवि को एक्ट के अनुसार अपना पाठ्यक्रम तैयार करना है। बिना ईसी, विद्या परिषद के गठन के विवि पाठ्यक्रम तैयार नहीं कर सकता है। विद्या परिषद की बैठक में पाठ्यक्रम अनुमोदन होता है। विद्या परिषद से पहले विवि की सर्वोच्च बॉडी ईसी का गठन होना जरूरी है। विद्या परिषद में ईसी के दो सदस्य होते है। ईसी के चार सदस्य कुलाधिपति, एक सदस्य राज्य सरकार, सीनियर संकायाध्यक्ष, आचार्य, उपाचार्य में एक-एक सदस्य तथा संबद्ध महाविद्यालय का एक सीनियर शिक्षक मनोनीत किया जाता है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों का प्रोफाइल तलाश करने में अधिक समय लग जाता है। ऐसी स्थिति में नए सत्र के लिए विवि का पाठ्यक्रम तैयार हो पाएगा या नहीं इसे लेकर संशय की स्थिति है।

कोट-
ईसी, विद्या परिषद और वित्त समिति का गठित करने के लिए कुलाधिपति और उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भेजा जा चुका है। विवि इन दिनों 7 मई से आयोजित होने वाली परीक्षा की तैयारियों में लगा हुआ है।
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डा.यूएस रावत कुलपति श्रीदेव सुमन विवि
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