नई टिहरी। नगर पालिका टिहरी अध्यक्ष पद पर दूसरी बार जीत दर्ज कर उमेश चरण गुसाई ने 61 वर्षों का इतिहास बदल दिया है। 1950 में पालिका गठन के उपरांत इस सीट पर दूसरी बार कोई भी प्रत्याशी जीत दर्ज नहीं कर पाया था। इससे पहले, गुसाईं ने 2011 के उप चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत का मिथक तोड़कर यह सीट भाजपा की झोली में डाली थी।
1950 में पालिका के गठन होने से लेकर 2008 तक नौ बार चुनाव हुए। इन 56 वर्षों में कभी भी पार्टियों के टिकट पर चुनाव लड़ने वाला प्रत्याशी जीत दर्ज नहीं कर पाया था। हमेशा ही निर्दलीय प्रत्याशी अध्यक्ष यहां बना। 2011 में पालिका अध्यक्ष पद के लिए हुए उप चुनाव में पहली बार भाजपा के सिंबल पर उमेश चरण गुसाईं को जीत दर्ज करने में कामयाबी मिली थी। 1988 से लेकर 2008 तक कांग्रेस और भाजपा से टिकट न मिलने पर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे चार लोगों ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की है। कांग्रेस से बागी निर्दलीय प्रत्याशी पहली बार 1988 में भागवत सिंह बिष्ट, 1997 में विजय सिंह पंवार, 2003 में दिनेश धनै और 2008 में भाजपा के बागी राकेश सेमवाल निर्दलीय अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने में कामयाब रहे। अध्यक्ष पद पर भागत बिष्ट ने दूसरी बार चुनाव लड़ा था, लेकिन वह जीत दर्ज कर नहीं कर पाए। पालिका में कोई भी अध्यक्ष रिपीट नहीं हो पाया। इस बार के चुनाव में भाजपा ने निवर्तमान पालिकाध्यक्ष गुर्साइं का टिकट काटकर खेम सिंह चौहान पर दांव खेला था। मगर गुसाईं ने पार्टी से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी बतौर किस्मत आजमाई और 1787 मतों से जीत दर्ज कर दूसरी बार पालिकाध्यक्ष की कुर्सी कब्जाने में कामयाब रहे।