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जहां गूंजती थी जिंदगी, वहां केवल मलबे के ढेर

Tehri Updated Fri, 01 Aug 2014 05:31 AM IST
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नौताड़ (घनसाली)।
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जिस घर के आंगन में कभी नन्हीं परियों की आवाज गूंजती थी, वहां अब मलबे के ढेर हैं। लोगों का रुदन है। 30-31 जुलाई की रात को आए जलप्रलय ने नौताड़ तोक के विनोद नौटियाल के सपने को पल भर में चूर कर दिया है। उसके आंखों के सामने हंसता-खेलता परिवार मलबे में दफन हो गया। लाचार विनोद प्रकृति के रौद्र रूप के सामने कुछ भी नहीं कर पाया। गांव के लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो पलभर में उनके पूर्वजाें की निशानी मटियामेट हो गई।
घनसाली-केदारनाथ मोटर मार्ग पर घनसाली से 5 किलोमीटर आगे ग्राम पंचायत जखन्याली के नौताड़ तोक में रात 2.15 मिनट पर बादल फटने की खबर सुनकर जब यह संवाददाता सुबह पौने दस बजे मौके पर पहुंचा तो सामने का मंजर देखकर दिल दहल उठा। चारों तरफ मलबा ही मलबा था। इस मलबे में पुलिस के जवानों के साथ गांव के लोग अपनों को ढूंढ रहे थे। शायद कोई जिंदा मिल सके, लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। गांव के लोगों ने बताया कि कभी इस जगह पर 30 मकान थे। इन्हीं में से एक मकान विनोद नौटियाल का भी था। विनोद ऊर्जा निगम में संविदा में कार्य करता था। इन दिनों वह बच्चों को लेकर गांव में था। वैसे उसका परिवार घनसाली में ही रहता था। विनोद को सुबह मलबे से घायल अवस्था में निकाला गया। उसके शरीर का पेट से नीचे का हिस्सा काम नहीं कर रहा है। इसी बीच दूसरी ओर चीख पुकार सुनाई दी। मैं उधर दौड़ा। देखा तो पुलिस का एक जवान छोटी बच्ची का शरीर हाथ पर लिए हुए था। यह विनोद की बेटी देवू(8) थी। मैं गांव की तरफ गया, तो वहां पर ताल गांव की 60 वर्षीय कुशला देवी मिली। मुलाकात में बताया कि 50 वष्रों में जखन्याली गदेरे का इतना रौद्र कभी नहीं देखा। गांव के रामानुज मिले तो उन्होंने बताया कि रात को घटना के वक्त चारों तरफ अंधेरा था। सिर्फ लोगों की चीख पुकार सुनाई दे रही थी। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। इस घटना में विनोद की पत्नी कमलेश देवी, पुत्री देवू, रीतिका दफन हो गई है। इस दौरान मौके पर डीएम युगल किशोर पंत और पुलिस अधीक्षक मुख्तार मोहसिन सुरक्षा बलों को दिशा-निर्देश दे रहे थे।
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