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राजीव गांधी साहसिक खेल अकादमी के काम की सुस्त रफ्तार

Tehri Updated Thu, 11 Sep 2014 05:31 AM IST
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नई टिहरी। निर्माण कार्यों की कछुआ चाल राजीव गांधी साहसिक खेल अकादमी पर भारी पड़ रही है। दो साल बाद भी अकादमी का आधारभूत ढांचा तैयार नहीं हो पाया है। ऐसे में 9-10 अक्तूबर को झील में रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग, मत्स्य पालन शुरू करने की पर्यटन विभाग की तैयारियों को झटका लग सकता है।
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42 वर्ग किमी में फैली टिहरी बांध की झील वर्ष 2005 से झील में संचालित होने वाली विभिन्न गतिविधियों की राह ताक रही है। 7 नवंबर 2012 को जब तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा ने पांच सौ करोड़ की लागत से राजीव गांधी साहसिक खेल अकादमी की आधारशिला रखी थी, तो क्षेत्र के लोगों को उम्मीद जगी थी कि यह झील अब रोजगार का जरिया बनेंगी। क्याकिंग, रिवर राफ्टिंग, वाटर स्किंग, पैराग्लाइडिंग और मत्स्य पालन शुरू होने से क्षेत्रवासी अपनी नई पहचान बनाएंगे। लेकिन पिछले दो सालों में ऐसा कुछ नहीं हो पाया।
दो साल में योजना निर्माण पूरा होने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन अब तक 30 फीसदी कार्य भी पूरे नहीं हो पाए हैं। काम के नाम पर कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने सिर्फ दो भवनों का आधा-अधूरा ढांचा तैयार किया है। निर्माण कार्यों पर अब तक 11 करोड़ खर्च हो चुके हैं।
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दो साल के अंतर्गत जितना काम का लक्ष्य तय किया गया था वह पूरा हो चुका है। काम लगातार चल रहा है। झील क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में काम चल रहा है। 9 और 10 अक्तूबर को वाटर स्पोर्ट्स, पैराग्लाइडिंग की तैयारियां जोरों पर है।
-जसपाल सिंह चौहान, जिला पर्यटन अधिकारी टिहरी
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