रोहतक से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित सुनारिया गांव अपने आप में लगभग 1200 साल पुराना इतिहास समेटे हुए है। यह गांव भारतीय सेना में अपने जवानों की लंबी सूची, बेहतरीन खिलाड़ियों और प्रसिद्ध सुनारिया जेल के कारण एक अलग पहचान रखता है। गांव के बीच से गुजरने वाली एक गली, जिसे 'गामा बिचाला गली' के नाम से जाना जाता है, इसे दो हिस्सों में बांटती है। इसके एक तरफ सुनारिया खुर्द और दूसरी तरफ सुनारिया कलां बसा है। गांव में कुल 9,700 मतदाता हैं, जिनमें से 2,200 सुनारिया खुर्द में और 7,500 सुनारिया कलां में हैं। विकास की दृष्टि से इस ऐतिहासिक गांव को 11 साल पहले नगर निगम की सीमा में शामिल किया गया था। देश सेवा में इस गांव का योगदान अतुलनीय है। ग्रामीणों के अनुसार, सुनारिया के हर तीसरे घर से एक जवान सेना में अपनी सेवाएं दे रहा है। इतना ही नहीं, यहां के युवाओं ने सेना में बड़े आधिकारिक पदों को भी सुशोभित किया है। गांव के ही बेटे अमित बुधवार 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय वायु सेना में एयर कमांडर के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।