यूपी के बलरामपुर में उतरौला क्षेत्र में मारपीट की घटना में घायल धनराज मौर्य की मौत के मामले में शनिवार को मुख्यमंत्री आर्थिक सहायता के तहत तीन लाख रुपये का चेक देने पहुंचे जिलाधिकारी विपिन जैन और पुलिस अधीक्षक विकास कुमार को परिजन व ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। नाराज परिजनों ने पहले चेक लेने से इनकार कर दिया। आरोपियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। क्षेत्रीय विधायक के समझाने पर ग्राम ग्रामीण शांत हुए और परिजनों ने चेक लिया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के साथ क्षेत्रीय विधायक राम प्रताप वर्मा भी अहरौला गांव पहुंचे थे। अधिकारियों ने मृतक के परिजनों को तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक सौंपना चाहा, लेकिन परिजनों ने यह कहते हुए चेक लेने से मना कर दिया कि घटना के 12 दिन बाद प्रशासन उनकी सुध लेने पहुंचा है। उनका आरोप था कि दोषियों के विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब ग्रामीणों ने आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट लगाने, उनके मकानों पर बुलडोजर चलाने तथा धनराज मौर्य के हत्यारों को फांसी देने की मांग उठाई। परिजनों ने यह नाराजगी भी जताई कि तुलसीपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने उनसे मुलाकात नहीं की। काफी देर तक चले मान-मनौव्वल के बाद विधायक राम प्रताप वर्मा ने परिजनों को हरसंभव सहायता और न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन आर्थिक सहायता का चेक लेने के लिए तैयार हुए। उधर, प्रशासन ने आरोपियों के कब्जे से पिपराराम क्षेत्र में करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि को मुक्त कराया है। एसडीएम मनोज कुमार सरोज ने बताया कि नवीन परती भूमि को कब्जामुक्त कराया गया है और वहां पुलिस चौकी स्थापित करने का प्रस्ताव शीघ्र भेजा जाएगा। मौके पर तहसीलदार वीरेंद्र प्रताप सहित राजस्व एवं पुलिस विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।