'पब्लिक निवेश फंड के जरिए हमने करीब 160 अरब डॉलर का फंड जुटाने की योजना बनाई'
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सऊदी अरब के मंत्रिमंडल ने तेल निर्यात पर आधारित अपनी अर्थव्यवस्था में बड़े सुधारों को मंजूरी दे दी है। अब सऊदी अरब तेल निर्यात पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में कदम उठाने जा रहा है। पिछले साल सऊदी अरब का 70 फीसदी राजस्व तेल निर्यात से आया लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से उसे खासा नुकसान उठाना पड़ा। डिप्टी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सुधारों की घोषणा करते हुए कहा कि देश को तेल की लत है।
उन्होंने सरकारी चैनल अल-अरबिया को बताया कि 'विजन 2030' योजना से ये सुनिश्चित किया जाएगा कि 2020 तक सऊदी अरब तेल निर्यात के बगैर काम चला सके। इस योजना में लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर की सरकारी तेल कंपनी अरमाको के पांच फीसदी से कुछ कम शेयर बेचे जाएंगे और एक सरकारी कोष बनाया जाएगा। ये कोष करीब दो ट्रिलियन डॉलर का होगा। नई वीजा प्रणाली लागू की जाएगी जिसमें प्रवासी मुसलमानों को सऊदी अरब में लंबे समय तक काम करने का मौका मिलेगा।
अब खनिज पदार्थों की खुदाई और सुरक्षा उपकरणों के निर्माण में निवेश बढ़ाया जाएगा। जून 2014 में कच्चे तेल के एक बैरल की कीमत 115 डॉलर थी और इन दिनों ये कीमत आधी से भी कम रह गई है। प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कहा कि इस योजना का कच्चे तेल की कीमतों से कोई लेना-देना नहीं है। पिछले दिनों तेल कीमतों में भारी गिरावट से प्रभावित सऊदी अरब में आम लोगों की सब्सिडी भी वापस ली गई थी।
प्रिंस क्राउन मोहम्मद बिन सलमान ने बताया कि पब्लिक निवेश फंड के जरिए हमने करीब 160 अरब डॉलर का फंड जुटाने की योजना बनाई है। सऊदी अरब भविष्य में अपनी अर्थव्यवस्था में महिलाओं को ऊंचे ओहदे पर रखन की भी योजना बना रहा है। यह बात उन्होंने अपनी पहली इंटरनेशनल कांफ्रेंस में कही जिसमें दुनिया भर के पत्रकारों ने हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि बिना तेल इंडस्ट्री की मदद के हमारा वर्ष 2002 तक करीब 160 अरब डॉलर का राजस्व इकट्ठा करने की योजना है।