सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Astrology ›   Vaastu ›   vastu temple shirdi sai baba

अच्छा तो यह है शिरडी के साईं बाबा की प्रसिद्घि का राज

Updated Fri, 27 Jun 2014 03:26 PM IST
विज्ञापन
vastu  temple shirdi sai baba
विज्ञापन

साईंबाबा सशरीर 1838 से 1918 के बीच इस दुनिया में रहे। उनके नाम, जन्म स्थान और उनकी जन्म तारीख के बारे में किसी को कुछ पता नहीं है। वह 16 वर्ष की उम्र में शिरडी आए। फकीरों की तरह रहने वाले बाबा सबको एक निगाह से देखते थे।

Trending Videos


इनका निवास स्थान शिरडी इनके जीवनकाल में ही प्रसिद्घि हो गया था। आज आलम यह है कि साईं की निगरी में देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्घालुओं का आना जाना लगा रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


शिरडी साईं की लोकप्रियता इतनी है कि भारत के अलग-अलग शहरों में बड़े आकार के करीब 3000 से अधिक सांई मंदिर बन चुके है और 200 से अधिक मंदिर विदेशों में बने हुए है, जबकि छोटे आकार के सांई मंदिरों की तो कोई गिनती ही नहीं है। अब सवाल उठता है कि आखिर साईं बाबा और शिरडी की प्रसिद्घि का कारण आखिर क्या है।

विज्ञापन

जिसने बनाया साई मंदिर को प्रसिद्घि

vastu  temple shirdi sai baba

शिर्डी के सांईबाबा के समाधी मंदिर की प्रसिद्धि मंदिर परिसर की वास्तुनुकूल भौगोलिक स्थिति और उस पर किये गए वास्तुनुकूल निर्माण के कारण है। आज से लगभग 150 वर्ष पूर्व जिस स्थान पर कुटिया का निर्माण किया गया था उस स्थान की भौगोलिक स्थिति पूर्णतः वास्तुनुकूल थी जो आज भी यथावत् ही है।

यहां पिछले कुछ दशकों से किए जा रहे निर्माण भी सहज भाव से वास्तुनुकूल ही हो रहे हैं, जबकि समाधी परिसर के अन्दर किये
जा रहे निर्माण को देखने से स्पष्ट हो जाता है कि यहां किया गया निर्माण बिना वास्तु विचारे ही हुआ है।

साईं मंदिर का वास्तु जिसने बनाया इसे प्रसिद्घ

vastu  temple shirdi sai baba

शिरडी के सांई मंदिर का द्वारका माई वह स्थान है जहां सांईबाबा भोजन बनाते थे, वहीं पर धूनी रमाते थे और उसी धूनी का प्रसाद लोगों को देते थे। धूनी की भभूत से लोगों के दुःख-दर्द दूर होते थे और वह स्थान जहां बाबा का समाधी मंदिर है दोनों स्थान पास-पास है।  यह दोनों स्थान वर्तमान सांई मंदिर परिसर की दक्षिण दिशा में है।

इस भाग की जमीन ऊंचाई लिए हुए है और परिसर के बाहर दक्षिण दिशा में सड़क है। सड़क के दूसरी ओर दुकानें हैं जहां प्रसाद, सांईबाबा के फोटो एवं साहित्य मिलते है। परिसर की चारों दिशाओं में द्वार है, परन्तु परिसर का मुख्यद्वार उत्तर दिशा में है जहां से भक्त कई बड़े कमरों से गुजरते हुए समाधी मंदिर तक जाते हैं।

जमीन की उत्तरी दिशा का यह भाग दक्षिण दिशा की तुलना में काफी नीचाई लिए हुए है। इसी प्रकार परिसर के पश्चिम दिशा वाले भाग में गार्डन है। परिसर के बाहर मनमाड़ जाने वाली सड़क है।

सड़क के दूसरी ओर होटल व दुकाने हैं। पश्चिम दिशा की जमीन पूरी समतल है, किन्तु सड़क से मंदिर की ओर पूर्व दिशा में जमीन ढलान लिए हुए है। इस प्रकार इस परिसर की पश्चिम दिशा ऊंची एवं पूर्व दिशा नीची हो रही है।

साईं धाम की इन खूबियों को भी जानिए

vastu  temple shirdi sai baba

मंदिर परिसर के बाहर दक्षिण दिशा स्थित सड़क और बाजार समतल है और उत्तर दिशा में परिसर के अन्दर व परिसर के बाहर दोनों तरफ ढ़लान है। उत्तर दिशा में सड़क के बाद जहां लड्डू का प्रसाद मिलता है। वह भाग काफी नीचाई लिए हुए है। उसके बाद जमीन फिर समतल हो गई है और यहीं से थोड़ी ही दूरी पर उत्तर दिशा में एक बड़ा नाला बह रहा है।

इस नाले के कारण भी उत्तर दिशा और अधिक नीची होकर वास्तुनुकूल हो गई है। परिसर की उत्तर दिशा में ही टॉयलेट-बाथरूम हैं और उनसे जुड़े सैप्टिक टैंक भी यहीं पर है। वास्तु सिद्धांत है कि, उत्तर दिशा नीची हो उसके साथ ही वहां पानी हो तो वह स्थान निश्चित ही प्रसिद्धि प्राप्त करता ही है।

पश्चिम दिशा ऊंची और पूर्व दिशा नीची हो तो वह स्थान स्थायित्व के साथ धनलाभ देता है। जैसे, तिरुपति बालाजी, श्रीरंगनाथ स्वामी मंदिर श्री रंगपत्तनम् इत्यादि। इन्हीं वास्तुनुकूलताओं के कारण यह स्थान सांईबाबा के समय से ही श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बन गया और सदैव बना रहेगा।

वैष्णो देवी और शिरडी में समानता

vastu  temple shirdi sai baba

मंदिर परिसर में किए जा रहे नए निर्माण भी वास्तुनुकूल हैं। मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर दक्षिण दिशा में बना है। जहां एक बड़े हाल में पश्चिम दिशा में ऊँचे प्लेटफार्म पर सांईबाबा की मूर्ति रखी है और उसी प्लेटफार्म पर मूर्ति के सामने ही समाधी है और हॉल का पूर्व दिशा वाला भाग नीचा है जहां भक्त खड़े होकर दर्शन करते हैं।

उत्तर दिशा स्थित मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार पूर्णतः वास्तुनुकूल है। द्वारिका माई का द्वार भी दक्षिण आग्नेय में वास्तुनुकूल स्थान पर है।

समाधी मंदिर दर्शन के लिए कतार में जाते समय विभिन्न हॉल से होकर गुजरना पड़ता है इस रास्ते में कुछ भाग तलघर का भी आता है यह तलघर मुख्य मंदिर की उत्तर दिशा में हैं। यह नवनिर्माण मंदिर की वास्तुनुकूलता को उसी प्रकार बढ़ा रहा है जिस प्रकार वैष्णोदेवी की नई बनी गुफाएं वैष्णोदेवी की लोकप्रियता और वैभव को बढ़ा रहा है।


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed