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Bihar: पटना के IGIMS में आयुष्मान भारत योजना में बड़ा घोटाला, फर्जी भर्ती और डिस्चार्ज से कितना गबन किया?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आदित्य आनंद
Updated Wed, 27 May 2026 08:30 AM IST
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सार
IGIMS Scam: बिहार में बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक आईजीआईएमएस IGIMS में आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। आरोप है कि फर्जी भर्ती और गलत डिस्चार्ज दिखाकर करोड़ों रुपये के गबन की कोशिश की गई। मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय कमेटी गठित की गई है।
आर्थिक अपराध।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच में फर्जी भर्ती, गलत डिस्चार्ज और सॉफ्टवेयर के जरिए फर्जी क्लेम पास कर करोड़ों रुपये के गबन की आशंका जताई गई है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए IGIMS प्रशासन से 48 घंटे के भीतर जवाब तलब किया है। वहीं पूरे मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी 48 घंटे के अंदर अपनी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपेगी।
सॉफ्टवेयर के जरिए फर्जी क्लेम का आरोप
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह पूरा खेल हॉस्पिटल इनफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (HIMS) सॉफ्टवेयर के जरिए किया जा रहा था। इस सॉफ्टवेयर के संचालन की जिम्मेदारी आउटसोर्सिंग कंपनी मेहता डाटा मैट्रिक्स के पास थी। मामले में कंपनी के कर्मचारी अमरजीत राज, चंदन, अभिषेक समेत चार लोगों पर आरोप लगे हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आयुष्मान कार्ड को सॉफ्टवेयर में फर्जी तरीके से अपलोड कर क्लेम पास कराया गया।
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कंपनी ने 45 लाख रुपये लौटाए
मामले के उजागर होने के बाद आउटसोर्सिंग कंपनी मेहता डाटा मैट्रिक्स ने 45 लाख रुपये वापस कर दिए हैं। हालांकि, आशंका जताई जा रही है कि घोटाले की राशि इससे कहीं अधिक हो सकती है। मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डॉ. प्रफुल्ल रंजन की शिकायत पर शास्त्रीनगर थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
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मरीजों से अवैध वसूली के भी आरोप लगे
सचिवालय एसडीपीओ-2 साकेत कुमार ने बताया कि आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मियों पर मरीजों से अवैध वसूली के भी आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी जांच में कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन और फर्जी क्लेम सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही आर्थिक अपराध इकाई (EOU) भी जांच अपने हाथ में ले सकती है।
IGIMS प्रशासन पर भी उठे सवाल
घोटाले के सामने आने के बाद IGIMS प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी लंबे समय तक कैसे चलती रही और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।