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कास्ट, काडर और मोदी फैक्टर से जीत या हार का आकलन
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 09 Apr 2014 01:24 AM IST
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हरियाणा लोकसभा चुनाव में दस अप्रैल को प्रत्याशियों की किस्मत इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन में कैद हो जाएगी। प्रचार का दौर थम चुका है। अब जातीय समीकरण की ओर उम्मीदवारों ने नजरें टिका दी हैं।
सुरक्षित सीट होने के कारण अंबाला संसदीय क्षेत्र में भाजपा को परंपरागत मतों के अलावा, पंजाबी, ब्राहमण, बनिया और राजपूत मतों के साथ मोदी की लहर का सहारा है जबकि कांग्रेस प्रत्याशी की नजर यहां बिरादरी के मतों के साथ परंपरागत मतों पर है। इनेलो और बसपा काडर वोट को लुभाने में सक्रिय हैं।
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कुरुक्षेत्र लोकसभा से कांग्रेस को बनिया समुदाय के साथ ही पार्टी के परंपरागत वोट पर, भाजपा को सवर्ण मतों केसाथ मोदी की लहर, इनेलो को जाट और सैनी मतों का सहारा है।
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करनाल में सभी दलों की निगाह ब्राहमण, पंजाबी, जाट और रोड बिरादरी पर लगी है। कांग्रेस यहां परंपरागत वोट टटोल रही है, जबकि भाजपा पंजाबी समुदाय के साथ मोदी की लहर पर टिकी है।
इनेलो को जाट और सिखों पर भरोसा है। बसपा का काडर वोट यहां खासा है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां बसपा दूसरे नंबर पर थी।
सोनीपत में कांग्रेस को मुख्यमंत्री की चौधर के साथ जाट वोटरों का सहारा है। इनेलो ने भी जाट वोटरों पर नजरें टिकाई हैं। यहां भाजपा ब्राहमण मतों और मोदी की लहर पर नजर टिकाए है।
सिरसा संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस को विकास और परंपरागत मतों का सहारा है। इनेलो यहां परंपरागत और सिख मतों के सहारे झंडा गाड़े है जबकि हजकां भाजपा गठबंधन प्रत्याशी को बिश्नोई और धानक समाज के मतों का सहारा है।
हिसार में चुनाव जाट और गैर जाट का है। हजकां भाजपा को यहां गैर जाट पर भरोसा है जबकि इनेलो और कांग्रेस को जाट और परंपरागत मतों का आसरा, आम आदमी पार्टी की नजर भी यहां पर जाट मतों पर टिकी है।
गुड़गांव में मेव और अहीर मतों से हार जीत तय होगी। यहां इनेलो ने मेव वोटों पर पूरी तरह से नजरें टिका दी है जबकि भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को अहीर मतों का सहारा है।
गुड़गांव में कार्पोरेट सेक्टर से जुड़ा वोट भी है, यह मतदान के दिन तय होगा कि यह वोट प्रतिशत कितना रहा। फरीदाबाद में कांग्रेस की नजर परंपरागत के साथ गुर्जर मतों पर है।
भाजपा मोदी की लहर के साथ गुर्जर और परंपरागत मतों नजरें जमाए है जबकि इनेलो को पंजाबी और जाट के साथ परंपरागत मतों का सहारा है।
भिवानी महेंद्रगढ़ में जाट मतों पर सभी पार्टियों की नजर है। यहां इनेलो को अहीर और परंपरागत मतों का भी सहारा है। रोहतक संसदीय क्षेत्र में भी सभी दलों की जाट मतों पर नजरें टिकी हैं।