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अनदेखीः अंधाधुंध छंटाई से चंडीगढ़ के पेड़ों पर मंडरा रहा है ‘खतरा’, दिखी डाई बैक की समस्या
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 18 Feb 2020 12:48 PM IST
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पेड़ों की छंटाई
- फोटो : अमर उजाला
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यूटी में अंधाधुंध प्रूनिंग (छंटाई) किए जाने से पेड़ों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है। सही तरीके से प्रूनिंग नहीं होने के कारण पेड़ों में डाई बैक की समस्या आ रही है। साथ ही पेड़ों में फफूंद लग रही है, जिससे पेड़ भीतर से खोखले भी हो रहे हैं। इससे पेड़ों के गिरने का भी हमेशा खतरा बना हुआ है। शहर की हरियाली को बचाने के लिए यूटी प्रशासन द्वारा वर्ष 2019 में फोरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफआरआई), देहरादून के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था। इन विशेषज्ञों ने शहर के विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण में विशेषज्ञों ने बताया कि शहर के अधिकांश पेड़ सही प्रूनिंग नहीं किए जाने के कारण कमजोर हो रहे हैं। देखरेख नहीं होने के कारण पेड़ों में डाई बैक की समस्या आ रही है। टीम के विशेषज्ञों ने अपनी प्राथमिक रिपोर्ट में यह कहा था कि प्रूनिंग का कार्य प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा किया जाना चाहिए। साथ ही प्रूनिंग के लिए आवश्यक दिशा निर्देशों का भी पालन होना चाहिए। इसके बाद भी शहर में प्रूनिंग का कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है।
1.25 करोड़ की मशीनों से होती है प्रूनिंग
चंडीगढ़ शहर में पेड़ों की प्रूनिंग कार्य करोड़ों की मशीनों से किया जाता है। इन मशीनों को नगर निगम द्वारा 2019 में 1.25 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। इन आधुनिक मशीनों से प्रूनिंग का कार्य तो आसान हो गया, लेकिन अंधाधुंध प्रूनिंग से पेड़ों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।
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निरीक्षण में विशेषज्ञों ने बताया कि शहर के अधिकांश पेड़ सही प्रूनिंग नहीं किए जाने के कारण कमजोर हो रहे हैं। देखरेख नहीं होने के कारण पेड़ों में डाई बैक की समस्या आ रही है। टीम के विशेषज्ञों ने अपनी प्राथमिक रिपोर्ट में यह कहा था कि प्रूनिंग का कार्य प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा किया जाना चाहिए। साथ ही प्रूनिंग के लिए आवश्यक दिशा निर्देशों का भी पालन होना चाहिए। इसके बाद भी शहर में प्रूनिंग का कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है।
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1.25 करोड़ की मशीनों से होती है प्रूनिंग
चंडीगढ़ शहर में पेड़ों की प्रूनिंग कार्य करोड़ों की मशीनों से किया जाता है। इन मशीनों को नगर निगम द्वारा 2019 में 1.25 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। इन आधुनिक मशीनों से प्रूनिंग का कार्य तो आसान हो गया, लेकिन अंधाधुंध प्रूनिंग से पेड़ों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।
पेड़ों के लिए क्यों जरूरी है प्रूनिंग
प्रूनिंग उन पेड़ों के लिए आवश्यक होती जो बेतरतीब रूप से बढ़ोतरी करते हैं। उनको एक अच्छी शेप देने के लिए प्रूनिंग की जाती है। इसके साथ ही पेड़ों की ऊंचाई को भी प्रूनिंग के जरिए रोका जाता है।
जरूरी है फफूंदी नाशक लेप लगाना
पेड़ों में प्रूनिंग वाले खुले स्थान पर फफूंद लगने का हमेशा खतरा बना रहता है। इस खुले स्थान पर फफूंदी नाशक या कच्चा गोबर का लेप लगाना आवश्यक है।
सही ढंग से नहीं हो रही है पेड़ों की प्रूनिंग
शहर में पेड़ों का प्रूनिंग कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। नियम के अनुसार पेड़ों की प्रूनिंग प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा की जानी चाहिए। साथ ही फफूंद नाशक या अन्य उपाय भी होने आवश्यक हैं, लेकिन इन सबकी शहर में अनदेखी हो रही है।
- राहुल महाजन, बागवानी विशेषज्ञ, चंडीगढ़
चंडीगढ़ के पेड़ों में डाई बैक की समस्या देखने को मिली है। प्रूनिंग का कार्य सहीं ढंग से नहीं किए जाने के कारण यह दिक्कत आती है। प्रूनिंग कार्य के लिए कर्मचारियों का प्रशिक्षित होना भी आवश्यक है।
- अमित पांडेय, वैज्ञानिक, एफआरआई, देहरादून
शहर में यदि पेड़ों में डाई बैक की समस्या है तो उसे ठीक कराया जाएगा।
- केपी सिंह, एससी, उद्यान विभाग, चंडीगढ़
जरूरी है फफूंदी नाशक लेप लगाना
पेड़ों में प्रूनिंग वाले खुले स्थान पर फफूंद लगने का हमेशा खतरा बना रहता है। इस खुले स्थान पर फफूंदी नाशक या कच्चा गोबर का लेप लगाना आवश्यक है।
सही ढंग से नहीं हो रही है पेड़ों की प्रूनिंग
शहर में पेड़ों का प्रूनिंग कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। नियम के अनुसार पेड़ों की प्रूनिंग प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा की जानी चाहिए। साथ ही फफूंद नाशक या अन्य उपाय भी होने आवश्यक हैं, लेकिन इन सबकी शहर में अनदेखी हो रही है।
- राहुल महाजन, बागवानी विशेषज्ञ, चंडीगढ़
चंडीगढ़ के पेड़ों में डाई बैक की समस्या देखने को मिली है। प्रूनिंग का कार्य सहीं ढंग से नहीं किए जाने के कारण यह दिक्कत आती है। प्रूनिंग कार्य के लिए कर्मचारियों का प्रशिक्षित होना भी आवश्यक है।
- अमित पांडेय, वैज्ञानिक, एफआरआई, देहरादून
शहर में यदि पेड़ों में डाई बैक की समस्या है तो उसे ठीक कराया जाएगा।
- केपी सिंह, एससी, उद्यान विभाग, चंडीगढ़