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सर्दी लौटी तो बहुत कुछ लौटा
सहीराम
Updated Sun, 24 Jan 2016 06:56 PM IST
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बस एक गुजरा हुआ जमाना ही लौटता नहीं, वर्ना तो जी बहुत कुछ लौट रहा है। और तो और, जो पुरस्कार-सम्मान लौटा दिए गए थे, उनमें से भी काफी कुछ वापस लौटने लगे हैं, मतलब लौटकर फिर पुरस्कृतों की ओर जा रहे हैं। चलो, यह अच्छी बात है। अब यह गंगा कौन-सी तरफ बह रही है, इसका तो पता नहीं। लेकिन करण जौहर की बात के साथ असहिष्णुता की बहस भी फिर लौट आई है।
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यों सर्दी लौटने के साथ काफी कुछ लौट आया है। वर्ना तो जी, लोगों को सर्दी में गर्मी का एहसास हो रहा था। डर लगने लगा था कि कहीं लू न चलने लगें। पर चलो जी, लू नहीं, शीतलहर ही चल रही है। अब लोगों का क्या है जी, वे तो लू से भी मरते हैं और शीतलहर से भी। बस फर्क यही है कि शीतलहर दानियों को कंबल दान कर पुण्य कमाने का मौका दे देती है। लू में वह बात नहीं। और देखिए, सर्दी भी अमेरिका के साथ लौटी है। वहां भी सुना है, बर्फीले तूफान आ रहे हैं और सड़कों पर दो-दो फुट बर्फ जम रही है। यह तो कुछ-कुछ जी-सेवन टाइप की सर्दी हो गई। इंतजार का फल मीठा होता है जी। अब तो गेहूं की बालियों में भी दाने पड़ जाएंगे। वर्ना तो किसानों के संकटों की एक और लहर शुरू हो जाने का डर था।
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पर सर्दी के साथ दिल्ली में ट्रैफिक जाम भी लौट आए। लोग कह रहे हैं कि ऑड-ईवन के दौरान जिस थोड़े-बहुत प्रदूषण को भगा पाने में सफलता मिली थी, वह भी पूरे-जोर से फिर लौट आया है। यहां तक कि स्याही भी फिर से लौट आई है। यह स्याही ही है जी, कालिख न कहो इसको। क्योंकि लगानेवाले भी इसे कालिख की तरह नहीं लगाते। यह इस माने में भी स्याही ही है कि जिस पर फेंको, उस पर तो नीली और काली स्याही फेंको, पर खुद अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करवा लो। हालांकि जिन लोगों को यह गुमान होता है कि वे स्वर्ण अक्षरों में अपना नाम दर्ज करवा रहे हैं, वे भी दर्ज काली स्याही में ही होते हैं। तो लौटा तो बहुत कुछ है, यहां तक कि दोस्ती के बाद आतंकवाद का डर भी लौट आया है।