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सीबीएसई का फैसला: ऑनलाइन क्लास और छमाही परीक्षा न देने वाले 12वीं के छात्र होंगे फेल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 07 Jul 2021 08:52 PM IST
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सार

अभी तक सीबीएसई के 12वीं के सभी छात्र यह मान कर चल रहे थे कि सभी को पास कर दिया जाएगा। ऐसे में कुछ छात्रों को उनकी लापरवाही अब भारी पड़ सकती है।

CBSE Exam 2021 Result: 12th class students who do not take online classes and half yearly exam will fail
रिजल्ट - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार

ऑनलाइन क्लास, प्री बोर्ड और छमाही परीक्षा में शामिल न होने वाले छात्रों को फेल किया जाएगा। केंद्रीय माध्यमिक बोर्ड (सीबीएसई) ने इसकी तैयारी कर ली है।  सीबीएसई की ओर से जारी सर्कुलर में साफ कर दिया है कि 2020-21 सत्र में ऑनलाइन क्लास, प्री बोर्ड और छमाही परीक्षाओं में गायब रहने वाले छात्रों को अनुपस्थित माना जाएगा। ऐसे छात्रों को परीक्षा देने का विकल्प मिलेगा या नहीं, इसका अंतिम फैसला बोर्ड के हाथों में होगा।

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सीबीएसई की ओर से स्कूलों को भेजे गए सर्कुलर में कहा गया है कि जो छात्र पूरे साल स्कूल के संपर्क में नहीं थे, स्कूल की किसी परीक्षा में शामिल नहीं हुए और ऑनलाइन क्लास भी अटेंड नहीं की, इन्हें अनुपस्थित माना जाए। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अनुपस्थित के रूप में चिह्नित छात्रों के नतीजे जारी न किए जाएं।
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ऑनलाइन क्लास, प्री बोर्ड और छमाही परीक्षाओं को लेकर हर एक बच्चे का डाटा स्कूल प्रबंधन के पास उपलब्ध है। ऐसे में अगर कोई छात्र ऑनलाइन क्लास, प्री बोर्ड और छमाही परीक्षाओं से गायब रहा तो उस छात्र को अनुपस्थित माना जाएगा।
- रणबीर सिंह, क्षेत्रीय निदेशक, सीबीएसई

50 फीसदी क्षमता के साथ खोले जाएं विवि और महाविद्यालय

छात्र संघर्ष समिति ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजकर सभी विश्वविद्यालय और महाविद्यालय 50 फीसदी क्षमता के साथ खोलने की मांग की है। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि छात्रों के भविष्य को देखते हुए शैक्षणिक संस्थान तुरंत खोलने पर फैसला लिया जाना चाहिए। 

समिति ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि प्रदेश में इस वक्त अनलॉक की प्रक्रिया चल रही है। बाजार, मॉल, प्राइवेट इंस्टीट्यूट, कोचिंग समेत अन्य संस्थान खुल रहे हैं, लेकिन महाविद्यालयों को लेकर अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। विवि और कॉलेज बंद होने के कारण छात्रों की पढ़ाई ठप है।

अब जबकि धीरे-धीरे अन्य संस्थान व प्रतिष्ठान खुल रहे हैं तो इनको भी खोला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पहाड़ी बाहुल्य राज्य है, जिस कारण दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों में हमेशा नेटवर्क की समस्या बनी रहती है। इसके कारण इन क्षेत्रों में रहने वाले छात्र ऑनलाइन पढ़ाई से भी वंचित हैं। 

उन्होंने कहा कि पहले ही कोरोना के कारण छात्रों की दो साल की पढ़ाई प्रभावित हो चुकी है। जल्द ही कॉलेज नहीं खोले गए तो छात्रों को और ज्यादा नुकसान झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सभी संस्थानों में कोविड सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य रूप से कराया जाए। ताकि, छात्रों को बीमारी से भी बचाया जा सके।

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