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केदारनाथ आपदा पर हरीश रावत को नहीं घेर पाया विपक्ष

अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 07 Feb 2014 11:45 AM IST
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harish rawat in assembly session
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आपदा पर सरकार को सात माह से घेर रहा विपक्ष पहली बार सदन में पहुंचे सीएम हरीश रावत को पुनर्निर्माण के मुद्दे पर घेरने में पूरी तरह से चूक गया।



रावत ने दिखाई चतुराई
रावत ने शून्य काल में विपक्ष के एक अन्य विषय पर रखे सवाल पर बड़ी चतुराई से आपदा पुनर्निर्माण एवं पुनर्स्थापना का अपना तैयार एजेंडा सदन में रख दिया।

विपक्ष ने सीएम पर मुद्दे से भटकने तक को लेकर टोकने और रोकने की कोशिश जरूर की लेकिन वह कभी सरल रहकर तो कभी थोड़ा तलखी दिखा अपनी बात रख गए।

लोकसभा कार्यवाही को संभाल सीएम हरीश रावत ने अपनी दक्षता का प्रमाण शून्य काल में दिया। विधायक बिशन सिंह चुफाल ने उनसे डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र में आपदा की बदहाल स्थिति को प्रस्तुत किया तो हरीश ने कमान संभाल ली।
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रावत ने आपदा के मुआवजों के निस्तारण की बात भाजपा के समय में हुई आपदाओं से शुरू की। उन्होंने कहा कि मैं 2010 की आपदा की बात नहीं करुंगा उस दौरान केंद्र की मिली सहायता खर्च करने की बात नहीं करुंगा।
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विपक्ष इससे पहले उनको घेरता वह तुरंत मुआवजों के निस्तारण को एक माह में करने की बात पर आ गए। रावत पूर्व विजय बहुगुणा को श्रेय देने से भी नहीं चुके और यह भी कह डाला कि अगर कुछ रिवीजन की जरूरत है तो की जाएगी।

मशीनरी की कमी को रखा
नेता प्रतिपक्ष ने जब उनके मुद्दे से भटक कर आपदा पुनर्निर्माण का खाका रखने की बात कही तो रावत थोड़े तलख हुए।

वह बोले कि आपदा पुनर्वास महत्वपूर्ण हैं अगर आप कहे तो मैं बैठ जाऊं। संसाधनों की दुहाई देने के बजाए उन्होंने मशीनरी की कमी को रखा।

निर्माण कार्यों में अधिकारियों को अधिक अधिकार देने पर उन्होंने विपक्ष से समर्थन मांगा। लगभग 15 मिनट में रावत ने अपना पूरी एक्शन प्लान सदन में रख दिय्रा।

नेताप्रतिपक्ष अजय भट्ट उनकी इस चतुराई को भांप भी गए बोले नियम 56 के सवालों का सीधा उत्तर दिया जाता है लेकिन मुख्यमंत्री डीडीहाट से शुरू कर अपनी बात आपदा तक ले गए। चूंकि सदन में उनका पहला दिन था और वह प्रदेश के हित की बात कर रहे थे इसलिए उन्हें नहीं टोका।

उन्होंने ने तो सम्मानित सदस्य का सटीक उत्तर दिया और न ही यह बताया कि केदारघाटी में कमरों में बंद सड़ रहे शवों का अंतिम संस्कार कब किया जाएगा।

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