अंधेरे में डूबा उत्तराखंड, आठ टरबाइनें ठप
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मंगलवार रात पहाड़ों पर हुई तेज बारिश के कारण जल विद्युत निगम की आठ परियोजनाओं की टरबाइनें थम गईं। इससे प्रदेश में बिजली संकट गहरा गया।
बुधवार को कई क्षेत्रों 12 घंटे तक आपूर्ति ठप रही। इस कटौती से औद्योगिक इकाइयों को भारी नुकसान झेलना पड़ा।
मंगलवार रात भारी बारिश से नदियों में बड़े-बड़े पेड़ और सिल्ट आने लगी। टरबाइनों को बचाने के लिए जल विद्युत निगम के इंजीनियरों ने परियोजनाओं के फाटक खोलकर पानी छोड़ना शुरू किया।
निगम ने बारह जल विद्युत गृहों में से छिबरो, चिला, ढकरानी, ढालीपुर, खोदरी, कुल्हाल, मनेरी भाली-प्रथम (तिलोथ), मनेरी भाली-द्वितीय (धरासू) जल विद्युत परियोजना में उत्पादन बंद कर दिया है।
तिलोथ विद्युत गृह से बुधवार शाम चार बजे और धरासू से दोपहर दो बजे उत्पादन मिलना शुरू हुआ। बाकी छह जल विद्युत गृहों से रात तक विद्युत उत्पादन शुरू नहीं हो पाया था।
इन इलाकों में छा गया अंधेरा
बुधवार सुबह चार बजे से नान कंटीनियस इंडस्ट्री सिडकुल हरिद्वार में 12 घंटे, नान कंटीनियस इंडस्ट्री गढ़वाल में 11 घंटे बिजली गुल रही।
सिडकुल पंतनगर और नान कंटीनियस इंडस्ट्री कुमाऊं में पौने छह घंटे की कटौती हुई। हरिद्वार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में नौ घंटे, ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण क्षेत्रों में पांच घंटे और गढ़वाल मंडल के छोटे शहरों में करीब ढाई घंटे की बिजली कटौती की गई।
ऊर्जा निगम के प्रवक्ता मधुसूदन ने बताया कि परियोजनाओं के बंद होने से बिजली कटौती करनी पड़ी।
बृहस्पतिवार को भी होगी दिक्कत
100 मेगावाट की क्षमता का कालागढ़ जल विद्युत गृह बुधवार देर रात से बृहस्पतिवार रात 12 बजे तक 42 मेगावाट ही विद्युत उत्पादन कर पाएगा। वहीं, उत्पादन ठप होने के कारण छिबरो जल विद्युत गृह से 17 जुलाई के लिए बिजली नहीं मिलेगी। बृहस्पतिवार के लिए ऊर्जा निगम ने 40 लाख यूनिट अतिरिक्त बिजली खरीदी है।