दिल्ली लाल किला ब्लास्ट: एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल कर रची गई आतंकी साजिश, NIA का बड़ा खुलासा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली के लाल किला इलाके में पिछले साल हुए कार बम विस्फोट मामले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी की चार्जशीट के अनुसार, वैश्विक आतंकी संगठन अल-कायदा से जुड़े एक मॉड्यूल के आरोपियों ने आतंकी साजिश रचने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्लेटफॉर्म और डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग किया।
यूट्यूब-चैट जीपीटी का किया इस्तेमाल
एनआईए की चार्जशीट में दावा किया गया है कि आरोपी जसिर ने यूट्यूब और चैट जीपीटी का इस्तेमाल करते हुए 'रॉकेट कैसे बनाएं' और 'मिश्रण किस अनुपात में होना चाहिए' जैसे सवाल खोजे थे। जांच एजेंसी ने इसे डिजिटल और एआई प्लेटफॉर्म के कथित दुरुपयोग का उदाहरण बताया है।
फ्लिपकार्ट से मंगाया सामान
जांच में यह भी पता चला है कि जसीर ने 2024-25 के दौरान दो से तीन बार फरीदाबाद, हरियाणा के अल फलाह विश्वविद्यालय परिसर में तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए डेरा डाला था। दिसंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच जसिर ने अपने फ्लिपकार्ट अकाउंट से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मंगवाए थे। इनमें सेंसर इंडक्टिव प्रॉक्सिमिटी स्विच, हीट गन, पीजो प्लेट, रिमोट कंट्रोल रिले-स्विच आएफ (रेडियो फ़्रीक्वेंसी) ट्रांसमीटर और रिसीवर किट, फ्लेमलेस रिचार्जेबल पॉकेट लाइटर, सोल्डरिंग किट और एलईडी इलेक्ट्रॉनिक किट शामिल थे। चार्जशीट के अनुसार, इन सामानों की खरीद के लिए पैसा डॉ. उमर ने दिया था और जासिर ने कैश-ऑन-डिलीवरी के जरिए सामान प्राप्त किया।
जांच में यह भी पता चला है कि जसीर ने पर डॉ. उमर, डॉ. मुजम्मिल शकील और अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर काजीगुंड जंगल में रॉकेट आईईडी का निर्माण और परीक्षण किया। एनआईए टीमों ने विस्तृत जांच के आधार पर जंगल से इन उपकरणों के अवशेष बरामद किए।
बता दें कि एनआईए ने 14 मई को पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत में 10 आतंकियों के खिलाफ 7500 पन्नों का विस्तृत आरोपपत्र दायर कर दिया है। इस धमाके में 15 लोगों की मौत हो गई थी और 35 लोग घायल हुए थे। एक दर्जन से अधिक वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे।
एनआईए के आरोपपत्र के अनुसार, धमाका ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ (एजीयूएच) नामक आतंकी संगठन ने किया था, जो अल-कायदा इन द इंडियन सबकांटिनेंट की शाखा है। दोनों संगठनों को पहले ही केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित घोषित किया जा चुका है। धमाके को अंजाम देने वाला आतंकी उमर उन नबी (पुलवामा, जम्मू-कश्मीर) स्वयं कार में बैठकर मानव बम बना था। एनआईए ने डीएनए फिंगरप्रिंटिंग से उसकी पहचान की पुष्टि की है। एनआईए ने अपनी जांच में पाया कि आरोपियों ने 2022 में श्रीनगर में गुप्त बैठक कर एजीयूएच को ‘एजीयूएच अंतरिम’ नाम से पुनर्जीवित किया था। इसके तहत उन्होंने ऑपरेशन हेवनली हिंद शुरू किया, जिसका उद्देश्य भारत सरकार को उखाड़ फेंकना और शरिया कानून लागू करना था।
इनके नाम आरोप पत्र में किए शामिल
आरोपपत्र में उमर उन नबी के अलावा डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, आमिर राशिद मीर, जसीर बिलाल वानी, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार शामिल हैं। कई आरोपी कश्मीर के कट्टरपंथी मेडिकल प्रोफेशनल बताए गए हैं।
वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिये साबित की गई वारदात
एनआईए का दावा है कि आरोपियों ने बड़े पैमाने पर हथियार जमा किए, नए सदस्य भर्ती किए, जिहादी प्रचार किया और घरेलू रसायनों से उच्च क्षमता वाले विस्फोटक तैयार किए। धमाके में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक ट्राईएसीटोन ट्राईपरॉक्साइड था, जिसे उन्होंने खुद तैयार किया था। 7500 पन्नों के आरोपपत्र में 588 मौखिक गवाहियों, 395 से अधिक दस्तावेजों और 200 से ज्यादा जब्त की गई वस्तुओं का जिक्र है। एनआईए ने फोरेंसिक, डीएनए, वॉयस एनालिसिस और वैज्ञानिक जांच के आधार पर पूरी साजिश को उजागर किया है।
इन धाराओं के तहत लगाए गए आरोप
आरोपपत्र यूएपीए 1967, भारतीय न्याय संहिता 2023, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908, शस्त्र अधिनियम 1959 और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की विभिन्न धाराओं के तहत दायर किया गया है। एनआईए ने अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी फरार आतंकियों की तलाश में तेजी से छानबीन कर रही है। यह मामला दिल्ली पुलिस से एनआईए को स्थानांतरित किया गया था। जांच एजेंसी का दावा है कि उसने एक बड़े जिहादी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है, जिसकी गतिविधियां जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर तक फैली हुई थीं।