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Delhi NCR News: पेट से निकला बालों का गुच्छा, लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से मिली राहत
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युवक ने बचपन में बाल खाना शुरू कर दिया था
ट्राइकोबेजोआर नाम की दुर्लभ बीमारी हो गई थी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पिछले दो-तीन महीने से पेट और सीने में दर्द से परेशान 24 साल के युवक का दिल्ली के एक निजी अस्पताल में सफल ऑपरेशन हुआ। जांच में पता चला कि उसके पेट में बालों का बड़ा गुच्छा जमा हो गया था। इसी वजह से उसे पेट दर्द और उल्टी जैसा लगता था। डॉक्टरों ने बताया कि यह ट्राइकोबेजोआर नाम की दुर्लभ बीमारी है। इसमें बाल निगलने से वे पेट में फंसकर गुच्छा बन जाते हैं। शरीर न इसे पचा पाता है न बाहर निकाल पाता है।
पहले एंडोस्कोपी से बाल निकालने की कोशिश हुई पर गुच्छा 9x5 सेंटीमीटर का बहुत सख्त था इसलिए छोटे चीरे लगाकर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई। खास बैग की मदद से पूरा गुच्छा बाहर निकाला गया। डॉ. अरुण भारद्वाज ने बताया कि सर्जरी के दो दिन बाद ही मरीज घर चला गया। उसे न कोई ट्यूब लगी न ड्रेन। अब वह ठीक है और सामान्य खाना खा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, यह बीमारी अक्सर बाल खींचने या बाल खाने की आदत से होती है। मरीज ने बचपन में किसी के कहने पर बाल खाना शुरू कर दिया था, जिससे उसे यह बीमारी हो गई।
ट्राइकोबेजोआर नाम की दुर्लभ बीमारी हो गई थी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पिछले दो-तीन महीने से पेट और सीने में दर्द से परेशान 24 साल के युवक का दिल्ली के एक निजी अस्पताल में सफल ऑपरेशन हुआ। जांच में पता चला कि उसके पेट में बालों का बड़ा गुच्छा जमा हो गया था। इसी वजह से उसे पेट दर्द और उल्टी जैसा लगता था। डॉक्टरों ने बताया कि यह ट्राइकोबेजोआर नाम की दुर्लभ बीमारी है। इसमें बाल निगलने से वे पेट में फंसकर गुच्छा बन जाते हैं। शरीर न इसे पचा पाता है न बाहर निकाल पाता है।
पहले एंडोस्कोपी से बाल निकालने की कोशिश हुई पर गुच्छा 9x5 सेंटीमीटर का बहुत सख्त था इसलिए छोटे चीरे लगाकर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई। खास बैग की मदद से पूरा गुच्छा बाहर निकाला गया। डॉ. अरुण भारद्वाज ने बताया कि सर्जरी के दो दिन बाद ही मरीज घर चला गया। उसे न कोई ट्यूब लगी न ड्रेन। अब वह ठीक है और सामान्य खाना खा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, यह बीमारी अक्सर बाल खींचने या बाल खाने की आदत से होती है। मरीज ने बचपन में किसी के कहने पर बाल खाना शुरू कर दिया था, जिससे उसे यह बीमारी हो गई।
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