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गौतमबुद्ध नगर में चलेंगी 500 ई-बसें : मुख्यमंत्री
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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा आयोजित कार्यक्रम में इलेक्ट्रिक सिटी बस को झंडी दिखाकर रवाना कर
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सीएम योगी ने लखनऊ से वर्जुअली दिखाई नोएडा, ग्रेनो और यमुना सिटी में 45 बसों को हरी झंडी
मुख्यमंत्री ने कहा, नोएडा, ग्रेनो और यमुना प्राधिकरण तय करें कि कितनी बसाें की है जरूरत
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा/नोएडा/ लखनऊ। गौतमबुद्धनगर के लोगों की जरूरत पूरी करने के लिए तीनों प्राधिकरण और यूपीएसआरटीसी 500 तक भी ई-बसें चलाएंगे। अभी 15 जून से 110 बसें नोएडा, ग्रेनो और यमुना सिटी में चलने लगेंगी। प्राधिकरण बसों की जरूरत का आकलन भी करेंगे। शुक्रवार को ई-बसों का संचालन शुरू करने के कार्यक्रम में लखनऊ से वर्चुअली जुड़े मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ये बातें कहीं। उन्होंने नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का शुभारंभ भी किया।
उन्होंने कहा कि शुक्रवार से तीनों प्राधिकरण क्षेत्र में 45 ई-बसों का संचालन शुरू होगा। उनका कहना है कि वायु प्रदूषण के अलावा पश्चिम एशिया में बने तनाव को देखते हुए ई-बसों के उपयोग काे बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। प्राधिकरण के सहयोग से यूपीएसआरटीसी जल्द ही 110 ई-बसों का संचालन शुरू कर देगा। पूरी संख्या में यह संचालन 15 जून से प्रारंभ हो जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पीएम मोदी ने देश को ग्रीन मोबिलिटी व सस्टेनेबल डेवलपमेंट का विजन दिया है। हम हर शहर-गांव को ग्रीन मोबिलिटी इलेक्ट्रिक सेवा से जोड़ेंगे। हर व्यक्ति को बेहतर, आरामदायक व पर्यावरण अनुकूल परिवहन सेवा मिलनी चाहिए। परिवहन विभाग का बेड़ा बड़ा हो रहा है, लिहाजा कार्य भी बड़े दिखने चाहिए।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर अभी तक ई-बस सेवा से वंचित था। अब यहां भी इसकी शुरुआत हो रही है। गर्व की बात है कि अब ई-बस का निर्माण भी यूपी में ही होगा। टाटा और हिंदुजा समूह ई-बस लखनऊ में अपने प्लांट लगाए हैं। इन दोनों प्लांट में ई-बसों का निर्माण किया जाना है। इससे बाहरी कंपनियों पर ई-बस की निर्भरता भी नहीं रह जाएगी। इस दौरान दादरी विधायक तेजपाल नागर, एमएलसी श्रीचंद शर्मा, सीईओ रवि कुमार एनजी, एसीईओ प्रेरणा सिंह व अन्य मौजूद रहे।
सेक्टर-33 स्थित शिल्प हाट में आयोजित कार्यक्रम में सांसद डॉ. महेश शर्मा, भाजपा महानगर अध्यक्ष महेश चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा, जिलाधिकारी मेधा रूपम, नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश समेत अन्य अधिकारी शामिल रहे। सांसद ने कहा कि यह सेवा ग्रीन मोबिलिटी के मॉडल के रूप में स्थापित करेगी।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ पश्चिम एशिया में चल रहे गतिरोध बड़ी चुनौतियां हैं। दुनिया वायु प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रही है। थोपे गए युद्धों की कीमत पूरी मानवता चुका रही है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना अथॉरिटी आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, स्टार्टअप्स, सेमीकंडक्टर आदि औद्योगिक गतिविधियों के बड़े केंद्र हैं। बड़ी कंपनियों को वहां लाने के साथ ही पर्यावरण अनुकूल परिवहन समय की मांग है। लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, औद्योगिक विकास मंत्री नंदगोपाल गुप्ता ‘नंदी’, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, राज्यमंत्री जसवंत सिंह सैनी आदि मौजूद रहे।
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जेवर एयरपोर्ट भी विकास का हब बना
मुख्यमंत्री ने कहा कि हजाराें साल तक अयोध्या विकास के लिए उपेक्षित रही। त्रेता युग में हजारों साल पहले प्रभु राम पुष्पक विमान से आए। अब यहां भी एयरपोर्ट की सौगात मिल चुकी है। जेवर एयरपोर्ट से भी उड़ान शुरू हो रही है। जेवर एमआरओ हब, कार्गो हब के रूप में भी खुद को स्थापित करने जा रहा है।
यमुना सिटी में तीन हाइड्रोजन बसें चलेंगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना सिटी में तीन हाइड्रोजन बसों का संचालन होगा। ये बसें हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलाई जाएंगी जो भूगर्भ जल या अन्य उपयोगी जल नहीं बल्कि सीवर को एसटीपी में शोधित कर निकलने वाली पानी से बनाया जाएगा। सीवर के पानी को शोधित करके उसी से हाइड्रोजन अलग कर उपयोग किया जाएगा। इन बसों को यमुना प्राधिकरण के मेडिकल डिवाइस पार्क, सेक्टर-28 से अन्य 11 ई-बसों के साथ रवाना किया। इन बसों से स्थानीय किसान बाद में नोएडा एयरपोर्ट भी भ्रमण करने के लिए गए। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह और सीईओ राकेश कुमार सिंह ने बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन
यीडा क्षेत्र में 3 हाइड्रोजन बसों के संचालन की पहल प्रदेश को हरित परिवहन की दिशा में आगे ले जाएगी। इससे प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन होगा, जो लगभग 1750 पेड़ लगाने के बराबर है। एनटीपीसी दादरी द्वारा विकसित ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी परियोजना के तहत इन बसों का निर्माण किया गया है। इनसे उत्सर्जन के रूप में केवल पानी निकलता है, जिससे वायु प्रदूषण की समस्या नहीं होती। इसके अलावा इस परियोजना से प्रति वर्ष करीब 1000 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। 42 यात्रियों की क्षमता वाली प्रत्येक बस में एक बार में 56 किलोग्राम हाइड्रोजन भरी जा सकेगी, जिससे लगभग 750 किलोमीटर तक की यात्रा संभव होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, नोएडा, ग्रेनो और यमुना प्राधिकरण तय करें कि कितनी बसाें की है जरूरत
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा/नोएडा/ लखनऊ। गौतमबुद्धनगर के लोगों की जरूरत पूरी करने के लिए तीनों प्राधिकरण और यूपीएसआरटीसी 500 तक भी ई-बसें चलाएंगे। अभी 15 जून से 110 बसें नोएडा, ग्रेनो और यमुना सिटी में चलने लगेंगी। प्राधिकरण बसों की जरूरत का आकलन भी करेंगे। शुक्रवार को ई-बसों का संचालन शुरू करने के कार्यक्रम में लखनऊ से वर्चुअली जुड़े मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ये बातें कहीं। उन्होंने नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का शुभारंभ भी किया।
उन्होंने कहा कि शुक्रवार से तीनों प्राधिकरण क्षेत्र में 45 ई-बसों का संचालन शुरू होगा। उनका कहना है कि वायु प्रदूषण के अलावा पश्चिम एशिया में बने तनाव को देखते हुए ई-बसों के उपयोग काे बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। प्राधिकरण के सहयोग से यूपीएसआरटीसी जल्द ही 110 ई-बसों का संचालन शुरू कर देगा। पूरी संख्या में यह संचालन 15 जून से प्रारंभ हो जाएगा।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पीएम मोदी ने देश को ग्रीन मोबिलिटी व सस्टेनेबल डेवलपमेंट का विजन दिया है। हम हर शहर-गांव को ग्रीन मोबिलिटी इलेक्ट्रिक सेवा से जोड़ेंगे। हर व्यक्ति को बेहतर, आरामदायक व पर्यावरण अनुकूल परिवहन सेवा मिलनी चाहिए। परिवहन विभाग का बेड़ा बड़ा हो रहा है, लिहाजा कार्य भी बड़े दिखने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर अभी तक ई-बस सेवा से वंचित था। अब यहां भी इसकी शुरुआत हो रही है। गर्व की बात है कि अब ई-बस का निर्माण भी यूपी में ही होगा। टाटा और हिंदुजा समूह ई-बस लखनऊ में अपने प्लांट लगाए हैं। इन दोनों प्लांट में ई-बसों का निर्माण किया जाना है। इससे बाहरी कंपनियों पर ई-बस की निर्भरता भी नहीं रह जाएगी। इस दौरान दादरी विधायक तेजपाल नागर, एमएलसी श्रीचंद शर्मा, सीईओ रवि कुमार एनजी, एसीईओ प्रेरणा सिंह व अन्य मौजूद रहे।
सेक्टर-33 स्थित शिल्प हाट में आयोजित कार्यक्रम में सांसद डॉ. महेश शर्मा, भाजपा महानगर अध्यक्ष महेश चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा, जिलाधिकारी मेधा रूपम, नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश समेत अन्य अधिकारी शामिल रहे। सांसद ने कहा कि यह सेवा ग्रीन मोबिलिटी के मॉडल के रूप में स्थापित करेगी।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ पश्चिम एशिया में चल रहे गतिरोध बड़ी चुनौतियां हैं। दुनिया वायु प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रही है। थोपे गए युद्धों की कीमत पूरी मानवता चुका रही है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना अथॉरिटी आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, स्टार्टअप्स, सेमीकंडक्टर आदि औद्योगिक गतिविधियों के बड़े केंद्र हैं। बड़ी कंपनियों को वहां लाने के साथ ही पर्यावरण अनुकूल परिवहन समय की मांग है। लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, औद्योगिक विकास मंत्री नंदगोपाल गुप्ता ‘नंदी’, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, राज्यमंत्री जसवंत सिंह सैनी आदि मौजूद रहे।
जेवर एयरपोर्ट भी विकास का हब बना
मुख्यमंत्री ने कहा कि हजाराें साल तक अयोध्या विकास के लिए उपेक्षित रही। त्रेता युग में हजारों साल पहले प्रभु राम पुष्पक विमान से आए। अब यहां भी एयरपोर्ट की सौगात मिल चुकी है। जेवर एयरपोर्ट से भी उड़ान शुरू हो रही है। जेवर एमआरओ हब, कार्गो हब के रूप में भी खुद को स्थापित करने जा रहा है।
यमुना सिटी में तीन हाइड्रोजन बसें चलेंगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना सिटी में तीन हाइड्रोजन बसों का संचालन होगा। ये बसें हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलाई जाएंगी जो भूगर्भ जल या अन्य उपयोगी जल नहीं बल्कि सीवर को एसटीपी में शोधित कर निकलने वाली पानी से बनाया जाएगा। सीवर के पानी को शोधित करके उसी से हाइड्रोजन अलग कर उपयोग किया जाएगा। इन बसों को यमुना प्राधिकरण के मेडिकल डिवाइस पार्क, सेक्टर-28 से अन्य 11 ई-बसों के साथ रवाना किया। इन बसों से स्थानीय किसान बाद में नोएडा एयरपोर्ट भी भ्रमण करने के लिए गए। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह और सीईओ राकेश कुमार सिंह ने बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन
यीडा क्षेत्र में 3 हाइड्रोजन बसों के संचालन की पहल प्रदेश को हरित परिवहन की दिशा में आगे ले जाएगी। इससे प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन होगा, जो लगभग 1750 पेड़ लगाने के बराबर है। एनटीपीसी दादरी द्वारा विकसित ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी परियोजना के तहत इन बसों का निर्माण किया गया है। इनसे उत्सर्जन के रूप में केवल पानी निकलता है, जिससे वायु प्रदूषण की समस्या नहीं होती। इसके अलावा इस परियोजना से प्रति वर्ष करीब 1000 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। 42 यात्रियों की क्षमता वाली प्रत्येक बस में एक बार में 56 किलोग्राम हाइड्रोजन भरी जा सकेगी, जिससे लगभग 750 किलोमीटर तक की यात्रा संभव होगी।