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गोरखपुर: गीडा की 56 औद्योगिक इकाइयों को देना होगा सीईटीपी संचालन का खर्च, जानिए क्या है वजह
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 22 Jun 2021 09:44 AM IST
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सार
इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी के शोधन के लिए 7.5 एमएलडी क्षमता का सीईटीपी हो रहा है स्थापित।
प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) की 56 औद्योगिक इकाइयों को कॉमन इफ्लूएंट टीट्रमेंट प्लांट (सीईटीपी) संचालन का खर्च वहन करना होगा। इन औद्योगिक इकाइयों से दूषित जल, बाहर प्रवाहित होता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ऐसी इकाइयों की लिस्ट तैयार की है। आने वाले समय में जब ऐसी इकाइयां और बढ़ेंगी तो उन्हें भी इस श्रेणी में शामिल कर लिया जाएगा।
दरअसल गीडा की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले दूषित जल के शोधन के लिए गीडा प्रशासन सीईटीपी लगवा रहा है। केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत इसे स्वीकृति मिली है। करीब 74 करोड़ की लागत से 7.5 मिलियन लीटर/दिन (एमएलडी) क्षमता का सीईटीपी प्लांट लगाया जा रहा है। इसे संचालित करने के लिए एक स्पेशल परपस व्हीकल (एसपीवी) का गठन होगा जिसमें गीडा के उद्यमी समेत अन्य कुछ लोग शामिल रहेंगे।
इस सीईटीपी को संचालित करने में काफी खर्च आएगा। प्रावधान के तहत इस सीईटीपी को संचालित करने में आने वाले खर्च की जिम्मेदारी उन उद्योगों की रहेगी, जिनसे काफी मात्रा में दूषित जल निकलता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ऐसे 56 औद्योगिक इकाइयों को चिह्नित किया है।
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दरअसल गीडा की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले दूषित जल के शोधन के लिए गीडा प्रशासन सीईटीपी लगवा रहा है। केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत इसे स्वीकृति मिली है। करीब 74 करोड़ की लागत से 7.5 मिलियन लीटर/दिन (एमएलडी) क्षमता का सीईटीपी प्लांट लगाया जा रहा है। इसे संचालित करने के लिए एक स्पेशल परपस व्हीकल (एसपीवी) का गठन होगा जिसमें गीडा के उद्यमी समेत अन्य कुछ लोग शामिल रहेंगे।
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इस सीईटीपी को संचालित करने में काफी खर्च आएगा। प्रावधान के तहत इस सीईटीपी को संचालित करने में आने वाले खर्च की जिम्मेदारी उन उद्योगों की रहेगी, जिनसे काफी मात्रा में दूषित जल निकलता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ऐसे 56 औद्योगिक इकाइयों को चिह्नित किया है।
उद्यमियों के साथ की बैठक
गीडा सीईओ पवन अग्रवाल ने बताया कि सीईटीपी के संचालन और अनुरक्षण का काम एसपीवी के माध्यम से किया जाएगा। इसमें इंडस्ट्रीज, गीडा समेत कुछ अन्य लोग भी शामिल होंगे। जो इंडस्ट्रीज प्रदूषण फैला रही हैं, सामान्य तौर पर उन्हें ही इसके संचालन का खर्च वहन करना होगा। इन सभी इंडस्ट्रीज के साथ गीडा का करार भी होगा। यह भी संभव है कि अन्य इकाइयों से कुछ ही चार्ज लिया जाए। दो से तीन महीने में एसपीवी का गठन कर लिया जाएगा।
गीडा के सीईओ ने सोमवार को एसपीवी गठन के लिए उद्यमियों के साथ बैठक की। तय हुआ कि जल्द ही एसपीवी का गठन किया जाएगा। वहीं जिन जल प्रदूषित करने वाली फैक्ट्रियों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चिह्नित किया है उन सभी के साथ सीईटीपी के संचालन में आने वाले खर्च वहन के लिए गीडा एमओयू करेगा। इस दौरान चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष आरएन सिंह ने प्रस्ताव रखा कि एसटीपी के लिए कंक्रीट कवर्ड नाली का निर्माण भी कराया जाए। इस दौरान दीपक कारीवाल, एहसान करीम, अशोक, ओम अग्रहरि समेत कई उद्यमी मौजूद रहे।
गीडा के सीईओ ने सोमवार को एसपीवी गठन के लिए उद्यमियों के साथ बैठक की। तय हुआ कि जल्द ही एसपीवी का गठन किया जाएगा। वहीं जिन जल प्रदूषित करने वाली फैक्ट्रियों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चिह्नित किया है उन सभी के साथ सीईटीपी के संचालन में आने वाले खर्च वहन के लिए गीडा एमओयू करेगा। इस दौरान चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष आरएन सिंह ने प्रस्ताव रखा कि एसटीपी के लिए कंक्रीट कवर्ड नाली का निर्माण भी कराया जाए। इस दौरान दीपक कारीवाल, एहसान करीम, अशोक, ओम अग्रहरि समेत कई उद्यमी मौजूद रहे।