गोरखपुर MMMUT की बड़ी खोज: सोने के नैनो कण पहचानेंगे कैंसर कोशिकाएं, ट्यूमर पर ही असर करेगी दवा
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर के शोधकर्ताओं ने कैंसर इलाज में क्रांतिकारी खोज की है। सोने के नैनो कण अब कैंसर कोशिकाओं को खुद पहचानकर सिर्फ ट्यूमर पर ही दवा रिलीज करेंगे। इससे कीमो के साइड इफेक्ट से राहत मिलेगी।
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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कैंसर के इलाज की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल की है। शोध में पाया गया है कि सोने (गोल्ड) के नैनो कण भविष्य में कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर सकेंगे। यही नहीं, जहां ट्यूमर होगा, दवा सीधा वहीं पहुंचकर असर करेगी।
यह शोध किया है भौतिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. बीके पांडेय व उनके शोधार्थियों डॉ. अभय प्रकाश श्रीवास्तव और सौरव मिश्र ने। यह शोध ''स्प्रिंगर नेचर'' समूह के ''जर्नल ऑफ मॉलीक्यूलर मॉडलिंग'' के मई के ऑनलाइन अंक में प्रकाशित हुआ है। शोध में डेंसिटी फंक्शनल थ्योरी (डीएफटी) के जरिये नई तकनीक विकसित करने की दिशा में कार्य किया गया है।
वर्तमान में कैंसर उपचार की सबसे बड़ी समस्या यह है कि दवाओं का प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ता है। ये दवाएं कैंसर कोशिकाओं के साथ-साथ स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे मरीजों को बाल झड़ने, कमजोरी, उल्टी, थकान और शरीर में दर्द जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
स्मार्ट ड्रग डिलीवरी सिस्टम की तरह कार्य करते हैं सोने के नैनो कण
शोधार्थी व संस्कृति यूनिवर्सिटी, मथुरा के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभय प्रकाश के मुताबिक, शोध में पाया गया कि सोने के नैनो कण शरीर के भीतर स्मार्ट ड्रग डिलीवरी सिस्टम की तरह कार्य कर सकते हैं। कैंसर कोशिकाओं के आसपास ग्लूटाथियोन नामक रसायन सामान्य से 10 गुना तक अधिक होता है।
यानी भविष्य में ऐसी दवा विकसित करना संभव है, जो शरीर में घूमते हुए खुद ही कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर प्रभाव डाले। इससे स्वस्थ अंगों को कम नुकसान होगा व इलाज पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रभावी बन सकेगा। यह भविष्य में कैंसर चिकित्सा की दिशा बदल सकता है।
शोधार्थी सौरव मिश्र ने बताया कि शोध में सोना, चांदी और प्लैटिनम जैसे सूक्ष्म धातु कणों का भी तुलनात्मक अध्ययन किया गया। परिणामों से पता चला कि सोने के नैनो कण दवा को सही समय पर छोड़ने में सबसे अधिक प्रभावी हैं, जबकि प्लैटिनम दवा को अत्यधिक मजबूती से बांध लेता है, जिससे दवा बाहर नहीं निकल पाती। अध्ययन में सोने के नैनो कण सबसे अच्छे तरीके से दवा को बॉडी में रिलीज कर रहे थे। उसके बाद सिल्वर रिलीज कर रहा था। प्लैटिनम बिल्कुल ही रिलीज नहीं कर रहा था।
प्रो. बीके पांडेय ने बताया कि करीब एक साल तक यह शोध कार्य चला है। पहले अलग-अलग संस्थानों में इस पर कई शोध हो चुके हैं, जिनमें नैनो पार्टिकल के साथ दवाएं निश्चित जगह पर पहुंच रही थीं लेकिन पहुंचने के बाद उसमें से कितने प्रतिशत तक रिलीज हो रही है और कितनी प्रभावी है, यह स्पष्ट नहीं था। शोध में इसी पर फोकस किया गया। इसमें 90 प्रतिशत से अधिक सटीकता पाई गई है।
दवाओं की लागत में आएगी कमी
शोधकर्ताओं के मुताबिक, कम दवा और कम दुष्प्रभाव के कारण उपचार की लागत में भी कमी आ सकती है। इससे कैंसर से जूझ रहे गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को विशेष रूप से लाभ मिलेगा। स्मार्ट कैंसर चिकित्सा की दिशा में यह शोध महत्वपूर्ण साबित होगा।