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उत्तराखंड में फंसे 13 कांवड़िये लौटे, आलू खाकर काट रहे समय
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
Updated Wed, 03 Aug 2016 12:11 AM IST
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पानीपत
- फोटो : पानीपत
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पानीपत। चार दिनों से ऋषिकेश व गोमुख मार्ग में गंगोत्री और बुडवाड़ी पहाड़ों पर शहर के कईकांवड़िये फंसे हुए हैं। बारिश में लगातार गिर रहे पहाड़ों के कारण सभी कांवड़िये अपने कैंटरों में ही दुबके हुए हैं। कांवड़ियों के पास खाने का राशन तक खत्म हो चुका है। कांवड़िये आलू खाकर अपनी जान बचा रहे हैं। हजारों फुट ऊंचे पहाड़ों पर आईटीबीपी और उत्तराखंड पुलिस उन्हें निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। पहाड़ों पर भारी फिसलन के कारण सुरक्षा बलों को ऑपरेशन चलाने में खासी मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच बाबरपुर मंडी के 13 कांवड़िये सकुशल अपने घर पहुंच गए। परिवार के लोगों ने उनको अपने गले से लगाकर दिल को तसल्ली दी।
पिछले चार दिन से उत्तराखंड के पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश के कारण लगातार पहाड़ खिसक रहे हैं। पहाड़ गिरने से ऋषिकेश-गोमुख मार्ग पूरी तरह बंद हो चुका है। कांवड़ लेने के लिए गोमुख गए हरियाणा समेत कई राज्यों के सैकड़ों कांवड़िये गंगोत्री और बुडवाड़ी के पहाड़ों पर फंसे हुए हैं। शहर के बाबरपुर मंडी, बलजीत नगर और हरि सिंह कॉलोनी के कई युवक गंगोत्री और बुडवाड़ी पहाड़ों पर कैंटरों में दुबके हुए हैं। बाबरपुर अपने घर लौटे मोहनलाल व अन्य ने बताया कि उत्तराखंड के फंसे कांवड़ियों का राशन खत्म हो चुका है। केवल आलू के सहारे जी रहे हैं। आईटीबीपी और उत्तराखंड पुलिस की पांच कंपनियों को पहाड़ हटाने में लगी हुई है। सेना के हेलीकॉप्टरों से कांवड़ियों तक बिस्कुट पहुंचाए जा रहे हैं। कांवड़ियों के घर नहीं लौटने से परिजन खासे चिंतित हैं। वहीं उत्तराखंड सरकार ने कांवड़ियों के परिजनों को उनकी सुरक्षा का पूर्ण भरोसा दिया है। सरकार ने सभी कांवड़ियों को सुरक्षित निकालने के लिए दो दिन का वक्त मांगा है।
शहर के ये युवक फंसे हैं
बाबरपुर मंडी निवासी मोहन, लवली, गोपाल, कृष्ण, राजेश, पवन बलजीत नगर निवासी सूरज, संजय और हरिसिंह कॉलोनी के सोनू, रविंद्र, प्रताप, विकास, अजय और समेत शहर के 40 युवक हजारों फुट की ऊंचाई पर पहाड़ों पर फंसे हुए हैं। पहाड़ पर फंसे कांवड़ियों में कई प्रदेशों के सैकड़ों युवक मौजूद हैं। कांवड़ियों के लिए पहाड़ से नीचे उतरने का कोई रास्ता नहीं है।
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चिंता में रात को नहीं सो पाते
बुडवाड़ी में पहाड़ों पर फंसे बाबरपुर निवासी लवली के बड़े भाई प्रवीण कुमार ने बताया कि बाबरपुर से 23 जुलाई को 22 युवक कांवड़ लेने के लिए गोमुख गए थे। 29 जुलाई को सभी युवक कांवड़ उठाकर घर के लिए निकले थे। नरेंद्र नगर के पास बुडवाड़ी में अचानक पहाड़ गिर गया। पहाड़ गिरने से पूरा मार्ग बंद हो गया। सात युवक कैंटर से उतरकर कांवड़ को लेकर पहाड़ों के रास्ते नीचे उतर आए। सात युवक शिवरात्रि दिन रात को घर पहुंचे हैं, जबकि 15 युवक अब भी बुडवाड़ी में ही फंसे हुए हैं। परिजन कांवड़ियों की चिंता में सो नहीं पा रहे हैं। रात पर पहाड़ों पर फसे कांवड़ियों से संपर्क करने की कोशिशों में लगे रहते हैं।
मौत का बिल्कुल सामने देखा है: मोहनलाल
पहाड़ गिरने के बाद पहाड़ों के रास्ते कांवड़ लेकर नीचे उतरे मोहनलाल ने बताया कि वह 22 युवक कांवड़ लेने के लिए गए थे। नरेंद्र नगर से पांच किलोमीटर दूर बुडवाड़ी में अचानक पहाड़ गिर गया। पहाड़ गिरने से रास्ता बंद हो गया। वह सात युवक पहले ही कांवड़ को लेकर पैदल चल रहे थे। पहाड़ धीरे-धीरे दरक रहे थे। पहाड़ो पर बहुत अधिक फिसलन भी। हजारों फुट ऊंचे पहाड़ों पर उन्होंने मौत का बिल्कुल करीब से देखा है। मोहनलाल ने बताया कि वह सातों किसी तरह से पहाड़ो से नीचे उतरकर ग्रामीणों की मदद से जगलों व पहाड़ों के रास्ते ऋषिकेश पहुंचे। ऋषिकेश पहुंचकर उन्होंने अपने परिजनों को फोन किया। बाबरपुर से 10 युवक उनकी मदद करने के लिए ऋषिकेश पहुंचे। बाद में दस युवक की मदद से वह कांवड़ ला पाए।
तीन दिन से नहीं हो रहा कांवड़ियों से संपर्क
गंगोत्री और बुडवाड़ी पहाड़ों पर फंसे कांवड़ियों से परिजनों का किसी प्रकार कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। सभी कांवड़ियों के मोबाइल फोन बंद है। ऐसे में कांवड़ियों के परिजन काफी परेशान है। उत्तराखंड सरकार के दो दिन में कांवड़ियों को सुरक्षित निकालने के आश्वासन के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली है। उत्तराखंड सरकार के अनुसार पहाड़ को रास्ते से हटाने में बारिश बाधा बन रही है।
पिछले चार दिन से उत्तराखंड के पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश के कारण लगातार पहाड़ खिसक रहे हैं। पहाड़ गिरने से ऋषिकेश-गोमुख मार्ग पूरी तरह बंद हो चुका है। कांवड़ लेने के लिए गोमुख गए हरियाणा समेत कई राज्यों के सैकड़ों कांवड़िये गंगोत्री और बुडवाड़ी के पहाड़ों पर फंसे हुए हैं। शहर के बाबरपुर मंडी, बलजीत नगर और हरि सिंह कॉलोनी के कई युवक गंगोत्री और बुडवाड़ी पहाड़ों पर कैंटरों में दुबके हुए हैं। बाबरपुर अपने घर लौटे मोहनलाल व अन्य ने बताया कि उत्तराखंड के फंसे कांवड़ियों का राशन खत्म हो चुका है। केवल आलू के सहारे जी रहे हैं। आईटीबीपी और उत्तराखंड पुलिस की पांच कंपनियों को पहाड़ हटाने में लगी हुई है। सेना के हेलीकॉप्टरों से कांवड़ियों तक बिस्कुट पहुंचाए जा रहे हैं। कांवड़ियों के घर नहीं लौटने से परिजन खासे चिंतित हैं। वहीं उत्तराखंड सरकार ने कांवड़ियों के परिजनों को उनकी सुरक्षा का पूर्ण भरोसा दिया है। सरकार ने सभी कांवड़ियों को सुरक्षित निकालने के लिए दो दिन का वक्त मांगा है।
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शहर के ये युवक फंसे हैं
बाबरपुर मंडी निवासी मोहन, लवली, गोपाल, कृष्ण, राजेश, पवन बलजीत नगर निवासी सूरज, संजय और हरिसिंह कॉलोनी के सोनू, रविंद्र, प्रताप, विकास, अजय और समेत शहर के 40 युवक हजारों फुट की ऊंचाई पर पहाड़ों पर फंसे हुए हैं। पहाड़ पर फंसे कांवड़ियों में कई प्रदेशों के सैकड़ों युवक मौजूद हैं। कांवड़ियों के लिए पहाड़ से नीचे उतरने का कोई रास्ता नहीं है।
चिंता में रात को नहीं सो पाते
बुडवाड़ी में पहाड़ों पर फंसे बाबरपुर निवासी लवली के बड़े भाई प्रवीण कुमार ने बताया कि बाबरपुर से 23 जुलाई को 22 युवक कांवड़ लेने के लिए गोमुख गए थे। 29 जुलाई को सभी युवक कांवड़ उठाकर घर के लिए निकले थे। नरेंद्र नगर के पास बुडवाड़ी में अचानक पहाड़ गिर गया। पहाड़ गिरने से पूरा मार्ग बंद हो गया। सात युवक कैंटर से उतरकर कांवड़ को लेकर पहाड़ों के रास्ते नीचे उतर आए। सात युवक शिवरात्रि दिन रात को घर पहुंचे हैं, जबकि 15 युवक अब भी बुडवाड़ी में ही फंसे हुए हैं। परिजन कांवड़ियों की चिंता में सो नहीं पा रहे हैं। रात पर पहाड़ों पर फसे कांवड़ियों से संपर्क करने की कोशिशों में लगे रहते हैं।
मौत का बिल्कुल सामने देखा है: मोहनलाल
पहाड़ गिरने के बाद पहाड़ों के रास्ते कांवड़ लेकर नीचे उतरे मोहनलाल ने बताया कि वह 22 युवक कांवड़ लेने के लिए गए थे। नरेंद्र नगर से पांच किलोमीटर दूर बुडवाड़ी में अचानक पहाड़ गिर गया। पहाड़ गिरने से रास्ता बंद हो गया। वह सात युवक पहले ही कांवड़ को लेकर पैदल चल रहे थे। पहाड़ धीरे-धीरे दरक रहे थे। पहाड़ो पर बहुत अधिक फिसलन भी। हजारों फुट ऊंचे पहाड़ों पर उन्होंने मौत का बिल्कुल करीब से देखा है। मोहनलाल ने बताया कि वह सातों किसी तरह से पहाड़ो से नीचे उतरकर ग्रामीणों की मदद से जगलों व पहाड़ों के रास्ते ऋषिकेश पहुंचे। ऋषिकेश पहुंचकर उन्होंने अपने परिजनों को फोन किया। बाबरपुर से 10 युवक उनकी मदद करने के लिए ऋषिकेश पहुंचे। बाद में दस युवक की मदद से वह कांवड़ ला पाए।
तीन दिन से नहीं हो रहा कांवड़ियों से संपर्क
गंगोत्री और बुडवाड़ी पहाड़ों पर फंसे कांवड़ियों से परिजनों का किसी प्रकार कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। सभी कांवड़ियों के मोबाइल फोन बंद है। ऐसे में कांवड़ियों के परिजन काफी परेशान है। उत्तराखंड सरकार के दो दिन में कांवड़ियों को सुरक्षित निकालने के आश्वासन के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली है। उत्तराखंड सरकार के अनुसार पहाड़ को रास्ते से हटाने में बारिश बाधा बन रही है।