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Chamba News: पॉक्सो मामले में आरोपी बरी, पीड़िता को मुआवजा देने के दिए आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। विशेष न्यायाधीश भुवनेश अवस्थी की अदालत ने चिकन शॉप संचालक एक व्यक्ति को नाबालिग से छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के आरोपों से बरी कर दिया है।
अदालत ने अभियोजन पक्ष की कहानी में समय और तारीख को लेकर गंभीर विसंगतियां पाते हुए आरोपी को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त घोषित किया।
हालांकि, अदालत ने माना कि अदालती कार्यवाही और आरोपों के चलते नाबालिग पीड़िता को गंभीर मानसिक आघात से गुजरना पड़ा है, जिसके पुनर्वास के लिए कोर्ट ने सरकार को दो लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश जारी किए हैं.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 28 अक्तूबर 2024 को एक 15 वर्षीय नाबालिग पीड़िता ने महिला पुलिस थाना हमीरपुर में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उसने तीन अलग-अलग व्यक्तियों पर अलग-अलग समय पर दुष्कर्म और प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।
इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। भले ही आरोपी के खिलाफ दोष साबित नहीं हो सका, लेकिन कोर्ट ने पीड़िता की मानसिक स्थिति और कम उम्र को देखते हुए संवेदनशीलता दिखाई।
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कोर्ट ने माना कि इस पूरी कानूनी प्रक्रिया नाबालिग बच्ची को भारी मानसिक संताप और सामाजिक तनाव झेलना पड़ा है, जिसका असर उसके व्यक्तित्व पर पड़ सकता है। पॉक्सो नियम 2020 और नालसा मुआवजा योजना 2018 के तहत कोर्ट ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए 2 लाख रुपये का मुआवजा मंजूर किया।
हमीरपुर। विशेष न्यायाधीश भुवनेश अवस्थी की अदालत ने चिकन शॉप संचालक एक व्यक्ति को नाबालिग से छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के आरोपों से बरी कर दिया है।
अदालत ने अभियोजन पक्ष की कहानी में समय और तारीख को लेकर गंभीर विसंगतियां पाते हुए आरोपी को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त घोषित किया।
हालांकि, अदालत ने माना कि अदालती कार्यवाही और आरोपों के चलते नाबालिग पीड़िता को गंभीर मानसिक आघात से गुजरना पड़ा है, जिसके पुनर्वास के लिए कोर्ट ने सरकार को दो लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश जारी किए हैं.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 28 अक्तूबर 2024 को एक 15 वर्षीय नाबालिग पीड़िता ने महिला पुलिस थाना हमीरपुर में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उसने तीन अलग-अलग व्यक्तियों पर अलग-अलग समय पर दुष्कर्म और प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।
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इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। भले ही आरोपी के खिलाफ दोष साबित नहीं हो सका, लेकिन कोर्ट ने पीड़िता की मानसिक स्थिति और कम उम्र को देखते हुए संवेदनशीलता दिखाई।
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