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Rampur Bushahar News: चायल पंचायत में भाजपा मंडल अध्यक्ष की हार बनी चर्चा का विषय
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निरमंड (कुल्लू)।
निरमंड खंड की चायल पंचायत में पंचायत चुनाव के परिणाम ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। भाजपा मंडल निरमंड के अध्यक्ष नरोत्तम ठाकुर को पंचायत प्रधान पद के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में नरोत्तम ठाकुर के अलावा जगदीश चंद, देवी सिंह ठाकुर और संजीव कुमार कुल चार प्रत्याशी मैदान में थे। देवी सिंह ठाकुर ने नरोत्तम ठाकुर को 109 मतों के अंतर से पराजित किया। इस हार के बाद क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि प्रदेश की बड़ी राजनीतिक पार्टी के मंडल अध्यक्ष को पंचायत स्तर के चुनाव में जनता ने क्यों नकार दिया। इससे पहले हाल ही में नगर पंचायत निरमंड के चुनाव में भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष योगेश भार्गव को भी हार का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत चुनाव भले ही स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं, लेकिन इसके परिणाम भविष्य की राजनीतिक दिशा का संकेत भी देते हैं। ऐसे में अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या इन परिणामों का असर आगामी विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिल सकता है। वहीं, कई लोग इसे जनता के स्थानीय नेतृत्व के प्रति असंतोष से जोड़कर भी देख रहे हैं।
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निरमंड खंड की चायल पंचायत में पंचायत चुनाव के परिणाम ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। भाजपा मंडल निरमंड के अध्यक्ष नरोत्तम ठाकुर को पंचायत प्रधान पद के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में नरोत्तम ठाकुर के अलावा जगदीश चंद, देवी सिंह ठाकुर और संजीव कुमार कुल चार प्रत्याशी मैदान में थे। देवी सिंह ठाकुर ने नरोत्तम ठाकुर को 109 मतों के अंतर से पराजित किया। इस हार के बाद क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि प्रदेश की बड़ी राजनीतिक पार्टी के मंडल अध्यक्ष को पंचायत स्तर के चुनाव में जनता ने क्यों नकार दिया। इससे पहले हाल ही में नगर पंचायत निरमंड के चुनाव में भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष योगेश भार्गव को भी हार का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत चुनाव भले ही स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं, लेकिन इसके परिणाम भविष्य की राजनीतिक दिशा का संकेत भी देते हैं। ऐसे में अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या इन परिणामों का असर आगामी विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिल सकता है। वहीं, कई लोग इसे जनता के स्थानीय नेतृत्व के प्रति असंतोष से जोड़कर भी देख रहे हैं।