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Rampur Bushahar News: नई शिक्षा नीति के दावे, रामपुर कॉलेज में तीन विषयों में प्रवेश बंद
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. एसएफआई ने रिक्त पदों को न भरने पर आंदोलन की दी चेतावनी
कहा-बिना शिक्षकों और संसाधनों के एनईपी को लागू करना छात्रों के साथ धोखा
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। शिक्षकों की भर्ती न कर पाना सरकार की विफलता है, लेकिन इसकी सजा छात्रों को दी जा रही है। राजकीय महाविद्यालय रामपुर में शिक्षक न होने के कारण तीन विषयों में प्रवेश प्रक्रिया बंद की गई है, जिससे कॉलेज में शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों को दिक्कतें पेश आ रही हैं। कॉलेज में मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र और कंप्यूटर एप्लीकेशन विषयों में प्रवेश बंद किए हैं। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) रामपुर इकाई ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। एक तरफ सरकार नई शिक्षा नीति के नाम पर चार वर्षीय पाठ्यक्रम, रिसर्च डिग्री और बहुविषयक शिक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रही है। दूसरी तरफ कॉलेजों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं और विषयों में प्रवेश तक बंद किया जा रहा है। यह नई शिक्षा नीति की वास्तविकता को उजागर करता है। बिना शिक्षकों और संसाधनों के एनईपी को लागू करना छात्रों के साथ धोखा है। सरकार उच्च शिक्षा को लगातार कमजोर कर रही है। छात्रों को उनकी पसंद के विषयों से वंचित करना शिक्षा के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। ग्रामीण और गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र दूसरे कॉलेजों में दाखिला लेने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए यह फैसला सीधे तौर पर उनके भविष्य पर हमला है। एसएफआई रामपुर इकाई अध्यक्ष मीना राम और सह सचिव विक्रांत ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार और उच्च शिक्षा विभाग की नाकामी का खामियाजा छात्रों पर थोपा जा रहा है। एसएफआई ने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से मांग उठाई की मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र और कंप्यूटर एप्लीकेशन विषयों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाए। कॉलेज में आवश्यक शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। साथ ही प्रदेश भर के महाविद्यालयों में रिक्त पदों को जल्द भरा जाए। एसएफआई कार्यकर्ताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार और कॉलेज प्रशासन ने इस छात्र-विरोधी निर्णय को वापस नहीं लिया तो एसएफआई छात्रों को संगठित कर व्यापक आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और घेराव करने के लिए मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।
कहा-बिना शिक्षकों और संसाधनों के एनईपी को लागू करना छात्रों के साथ धोखा
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। शिक्षकों की भर्ती न कर पाना सरकार की विफलता है, लेकिन इसकी सजा छात्रों को दी जा रही है। राजकीय महाविद्यालय रामपुर में शिक्षक न होने के कारण तीन विषयों में प्रवेश प्रक्रिया बंद की गई है, जिससे कॉलेज में शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों को दिक्कतें पेश आ रही हैं। कॉलेज में मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र और कंप्यूटर एप्लीकेशन विषयों में प्रवेश बंद किए हैं। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) रामपुर इकाई ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। एक तरफ सरकार नई शिक्षा नीति के नाम पर चार वर्षीय पाठ्यक्रम, रिसर्च डिग्री और बहुविषयक शिक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रही है। दूसरी तरफ कॉलेजों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं और विषयों में प्रवेश तक बंद किया जा रहा है। यह नई शिक्षा नीति की वास्तविकता को उजागर करता है। बिना शिक्षकों और संसाधनों के एनईपी को लागू करना छात्रों के साथ धोखा है। सरकार उच्च शिक्षा को लगातार कमजोर कर रही है। छात्रों को उनकी पसंद के विषयों से वंचित करना शिक्षा के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। ग्रामीण और गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र दूसरे कॉलेजों में दाखिला लेने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए यह फैसला सीधे तौर पर उनके भविष्य पर हमला है। एसएफआई रामपुर इकाई अध्यक्ष मीना राम और सह सचिव विक्रांत ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार और उच्च शिक्षा विभाग की नाकामी का खामियाजा छात्रों पर थोपा जा रहा है। एसएफआई ने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से मांग उठाई की मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र और कंप्यूटर एप्लीकेशन विषयों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाए। कॉलेज में आवश्यक शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। साथ ही प्रदेश भर के महाविद्यालयों में रिक्त पदों को जल्द भरा जाए। एसएफआई कार्यकर्ताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार और कॉलेज प्रशासन ने इस छात्र-विरोधी निर्णय को वापस नहीं लिया तो एसएफआई छात्रों को संगठित कर व्यापक आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और घेराव करने के लिए मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।