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Rampur Bushahar News: चौपाल के जंगलों में लौटी रौनक, गुज्जर समुदाय ने डाले डेरे

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jun 2026 11:30 PM IST
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The forests of Chaupal have regained their glory
चौपाल में आए गुज्जर समुदाय के लोग। संवाद
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रियासतकाल से हर साल गर्मियों में आते हैं चार माह के प्रवास में
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प्रवास के दौरान करेंगे दूध, खोया, पनीर का कारोबार

संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा(रोहड़ू)। चौपाल के जंगलों में रौनक लौट आई है। घुमंतू गुज्जर समुदाय के लोग अपने चार माह के वार्षिक प्रवास के लिए चौपाल उपमंडल के जंगलों में पहुंच गए हैं। रियासतकाल से यह समुदाय गर्मियों में हिमाचल के जंगलों में पहुंचता है। सर्दियों में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में प्रवास करता है। वन विभाग इन्हें प्रतिवर्ष जंगलों में रहने के परमिट जारी करता है, जिसमें प्रवास का स्थान और पशुओं की संख्या लिखी होती है। इन दिनों चौपाल विधानसभा क्षेत्र के ऊंचाई वाले वनों में गुज्जरों ने अपने पशुओं संग अस्थायी डेरे डाले हैं। चौपाल, नेरवा, सरांह और ठियोग के देहा में गर्मियों में दूध, खोया, पनीर और मक्खन की अधिकांश आपूर्ति गुज्जर करते हैं। इनकी आपूर्ति से इन वस्तुओं के दाम घट जाते हैं। मैदानी क्षेत्रों में गर्मी और चारे की कमी के कारण ये अप्रैल के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से चौपाल, ठियोग और पड़ोसी पर्वतीय चरागाहों में आते हैं। करीब चार माह इन कच्चे अस्थायी डेरों में रहने के बाद अगस्त या सितंबर में मैदानी क्षेत्रों को लौट जाते हैं। प्रवास के दौरान, ये नजदीकी बाजारों में दूध, खोया व पनीर बेचकर आजीविका चलाते हैं। पहले ये पशुओं संग पैदल ही सफर करते थे। अब सड़कें बनने से वे पशुओं को ट्रकों में लादकर अधिकांश सफर पूरा करते हैं।
जीवन शैली में आया बदलाव
समय के साथ गुज्जर समुदाय की जीवन शैली में परिवर्तन आ रहा है। युवा पीढ़ी अब घुमंतू व्यवस्था त्यागकर एक ही स्थान पर रहना पसंद कर रही है। उनका मानना है कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए यह घुमंतू जीवन छोड़ना आवश्यक है। हर साल स्थान बदलने से बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। परिणामस्वरूप, उनमें साक्षरता दर बेहद कम है।
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नई पीढ़ी ने पुश्तैनी व्यवसाय से बनाई दूरी
बुजुर्गों का मानना है कि उनकी पीढ़ी के बाद यह व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। उन्हें इस व्यवस्था के कारण बेहद कठिन जीवन जीना पड़ता है। इसलिए, अधिकांश युवा अब पशुपालन का पुश्तैनी व्यवसाय छोड़कर अन्य काम धंधों की ओर रुख कर रहे हैं। यह बदलाव समुदाय के भविष्य पर गहरा प्रभाव डालेगा। यह प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है।
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