21 लाख लेकर थमा दिया फर्जी नियुक्ति पत्र: लोको पायलट बनने का सपना टूटा, जॉइनिंग के दिन खुली ठगी की पूरी कहानी
Railway Job Scam:ओडिशा के गंजम जिले में रेलवे में लोको पायलट की नौकरी दिलाने के नाम पर एक युवक से 21 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी ने फर्जी नियुक्ति पत्र और जॉइनिंग लेटर देकर परिवार का भरोसा जीत लिया। कोलकाता में जॉइनिंग के दौरान दस्तावेज फर्जी निकले। पैसे वापस मांगने पर आरोपी ने धमकी दी। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
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सरकारी नौकरी पाने का सपना आज भी लाखों युवाओं और उनके परिवारों की सबसे बड़ी उम्मीदों में शामिल है। इसी उम्मीद का फायदा उठाकर ठग बेरोजगार युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं। ओडिशा के गंजम जिले से ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां रेलवे में लोको पायलट की नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक युवक से 21 लाख रुपये ठग लिए गए। आरोपी ने फर्जी नियुक्ति पत्र और जॉइनिंग लेटर तक तैयार कर दिए। लेकिन जब युवक नौकरी जॉइन करने कोलकाता पहुंचा, तब पूरे फर्जीवाड़े की पोल खुल गई।
पुलिस के अनुसार गंजम जिले के रहने वाले एक युवक को गदाधर नामक व्यक्ति ने रेलवे में लोको पायलट की नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया था। आरोपी ने दावा किया कि उसके रेलवे अधिकारियों से अच्छे संबंध हैं और वह नौकरी लगवा सकता है। इस भरोसे में आकर पीड़ित और उसके परिवार ने आरोपी को किस्तों में कुल 21 लाख रुपये दे दिए। नौकरी मिलने की उम्मीद में परिवार लंबे समय तक आरोपी पर भरोसा करता रहा।
क्या फर्जी नियुक्ति पत्र देकर जीता गया था भरोसा?
पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए आरोपी ने कथित तौर पर पूर्व रेलवे, कोलकाता के नाम से फर्जी जॉब ऑफर लेटर और जॉइनिंग लेटर तैयार कर दिए। दस्तावेज देखने के बाद परिवार को लगा कि नौकरी वास्तव में लग गई है। युवक भी पूरी तैयारी के साथ जॉइनिंग के लिए कोलकाता पहुंच गया। लेकिन रेलवे अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच के दौरान पाया कि सभी कागजात फर्जी हैं। पुलिस के अनुसार उन पत्रों पर न तो कोई वैध अधिकारी का नाम था और न ही कोई आधिकारिक पता। जांच में पूरा मामला धोखाधड़ी का निकला।
कोलकाता पहुंचते ही कैसे खुली ठगी की पोल?
जब युवक नियुक्ति पत्र लेकर रेलवे कार्यालय पहुंचा तो अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि नियुक्ति पत्र पूरी तरह जाली है और रेलवे की ओर से ऐसा कोई पत्र जारी ही नहीं किया गया था। इसके बाद युवक और उसके परिवार को एहसास हुआ कि उनके साथ बड़ी ठगी हो चुकी है। जिस नौकरी के लिए उन्होंने लाखों रुपये खर्च किए थे, वह केवल एक छलावा निकली।
पैसे मांगने पर आरोपी ने क्या किया?
मामला सामने आने के बाद पीड़ित ने आरोपी से अपनी रकम वापस मांगी। आरोपी ने शुरुआत में छह महीने के भीतर पैसे लौटाने का भरोसा दिया। लेकिन समय बीतने के बाद भी रकम वापस नहीं मिली। जब पीड़ित दोबारा आरोपी के घर पहुंचा तो मामला और गंभीर हो गया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने पीड़ित के साथ अभद्र व्यवहार किया, गाली-गलौज की और कथित तौर पर तलवार लेकर उसका पीछा भी किया। साथ ही उसे जान से मारने की धमकी दी गई।
क्या समझौते के बाद भी नहीं लौटी रकम?
घटना के बाद पीड़ित ने पहले धूसुरी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। वहां दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया। समझौते के तहत आरोपी ने चार महीने में पूरी रकम लौटाने की बात मानी और मौके पर 3 लाख रुपये वापस भी दिए। हालांकि बाद में उसने शेष राशि लौटाने से परहेज किया और समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया। इसके बाद पीड़ित ने असका पुलिस थाने में नई शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ क्या कार्रवाई की?
नई प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपी गदाधर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने इसी तरह और कितने लोगों को नौकरी का झांसा देकर ठगा है। अधिकारियों ने युवाओं को सलाह दी है कि किसी भी सरकारी नौकरी के नाम पर पैसे मांगने वाले लोगों से सावधान रहें और नियुक्ति से जुड़ी जानकारी केवल आधिकारिक माध्यमों से ही सत्यापित करें। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सरकारी नौकरी की चाहत का फायदा उठाकर ठग किस तरह लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं।