दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक और महिलाओं का बढ़ा भाजपा में दबदबा
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आगामी चुनावों के कारण पीएम मोदी भाजपा का चेहरा बदलने में जुटे हुए हैं। सरकार के कामकाज के जरिए वे पार्टी की बनी एक वर्ग विशेष की छवि को तोड़कर इसे सर्वसमाज के हितैषी के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। मगर इस राह में सरकार की गतिशीलता सबसे बड़ा रोड़ा है। जिसे लेकर मोदी भी चिंतित बताए जा रहे हैं। लेकिन इस कार्य को वे किसी अतिथि पात्र के बजाय राजनेताओं के जरिए ही अंजाम देना चाहते हैं।
यही वजह है कि कयासों के बावजूद मंत्रिमंडल में किसी बाहरी हस्ती की एंट्री नहीं हुई है। बल्कि राजनेताओं को साथ लेकर ही मोदी ने सरकार की गतिशीलता बढ़ाने का प्रयास किया है। हालांकि चेहरा चुनने में उन्होंने सरकार और संगठन के नेताओं संग व्यापक विमर्श भी किया है। तो प्रदर्शन को आधार बनाते हुए कुछ मंत्रियों की छूट्टी कर पीएम ने प्रदर्शन न कर पाने वाले कुछ और मंत्रियों को संकेत भी दे दिया है।
सूत्र बताते हैं कि मोदी ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और संघ के शीर्ष नेतृत्व के अलावा राजनाथ सिंह, अरूण जेटली, नितिन गड़करी और सुषमा स्वराज से भी मंत्रिमंडल विस्तार के लिए सांसदों के नाम मांगे थे। इन सब लोगों के जरिए नाम आने के बाद मोदी ने उन नामों का स्वयं से आकलन किया। उसके बाद जातीय और क्षेत्रीय संतुलन के साथ योग्यता तथा संसद में प्रदर्शन को आधार बनाते हुए उन्होंने योग्य मंत्रियों का चयन किया है। ताकि मंत्रिमंडल की गतिशिलता बढ़े। यही वजह है कि मंत्रियों के शैक्षणिक योग्यता और उनके व्यवसाय का भी ख्याल रखा गया है।
नेताओं की नई खेप को बेशक अभी राज्य मंत्री बनाया गया है। लेकिन उनके प्रदर्शन का आकलन करने के बाद पीएम जल्द ही इनमें से कइयों को कैबिनेट के रूप में आगे बढ़ाएंगे। बताया जा रहा है कि कैबिनेट मंत्रियों को विशेष निर्देश देकर मोदी नए राज्य मंत्रियों को अच्छा-खासा काम दिलवाएंगे। ताकि ये नए नेता भाजपा का भविष्य बन सकें।
सूत्र बताते हैं कि मोदी को सबसे बड़ी उम्मीद कृष्णा राज और अनुप्रिया पटेल से है। कृष्णा के जरिए भाजपा की रणनीति पासी समाज को अपने साथ जोड़ने की है। तो अनुप्रिया में भाजपा को यूपी का भविष्य नजर आ रहा है। अपना कामकाज ठीक रखने के साथ कुर्मी मतों को साधने में यदि वे सफल रहीं तो अगले 5 से 10 में वे यूपी में भाजपा की ओर से सीएम का चेहरा बन सकती हैं।
दलित और ओबीसी की बढ़ी बड़ी भागीदारी
भाजपा को सर्वसमाज की पार्टी बनाने की कवायद में मंत्रिमंडल विस्तार से सरकार में ओबीसी और दलितों की भागीदारी सबसे ज्यादा बढ़ी है। पीएम मोदी के अलावा सरकार में ओबीसी के 12 मंत्री थे। इस वर्ग से 6 नए मंत्रियों के आने से सरकार में ओबीसी वर्ग के मंत्रियों की संख्या 18 हो गई है। जबकि पीएम खुद पिछड़ा वर्ग से हैं। तो दलित समाज से 5 नए मंत्री बनने के बाद मोदी के मंत्रिमंडल में दलितों की संख्या 8 हो गई है।
2 नए मंत्रियों के साथ अनुसूचित जनजाति की सरकार में नुमाइंदगी बढ़कर 5 हो गई है। महिलाओं और अल्पसंख्यकों की भी भागीदारी सरकार में बढ़ी है। कृष्णा राज और अनुप्रिया पटेल के रूप में दो महिला मंत्री शामिल होने के साथ सरकार में महिलाओं की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।
अल्पसंख्यकों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। एसएस अहलूवालिया और एम जे अकबर के सरकार में शामिल होने से मोदी के मंत्रिमंडल में अल्पसंख्यकों की संख्या बढ़कर 4 हो गई है। वैसे पीएम मोदी भाजपा के आधार को आजादी के बाद वाली कांग्रेस की स्थिति में लाना चाहते हैं।
इसलिए उनका जोर भाजपा को अगड़ी जाति की पहचान से हटाकर सर्वसमाज के रूप में स्थापित करना है। इस प्रयास में मोदी ने अपनी सरकार को गांव, गरीब और किसान हितैषी के रूप में स्थापित करने का निर्णय लिया है। उनकी सरकार का हर कार्य इसी मकसद को ध्यान में रखकर हो रहा है।