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Supreme Court: 'सिर्फ अदालती डर से नहीं बच सकता पर्यावरण', चंबल में अवैध खनन पर कोर्ट सख्त; दिए ये निर्देश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 27 May 2026 05:26 AM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल अदालत के दबाव से नहीं चल सकता। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश को सीसीटीवी लगाने, कंट्रोल रूम बनाने और अवैध खनन में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। आइए, इन निर्देशों के बारे में विस्तार से जानते हैं...

Supreme Court Says Environment Cannot Saved Through Fear of Courts Strict Stance on Illegal Mining in Chambal
यूपी, राजस्थान और एमपी को कोर्ट के कड़े निर्देश - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में चल रहे अवैध रेत खनन पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने साफ कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल अदालत के दबाव या अधिकारियों के डर से नहीं चल सकता। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकारों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि संवेदनशील इलाकों में अवैध खनन रोकने के लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था बनाई जाए। अदालत ने सीसीटीवी कैमरे लगाने, नियंत्रण केंद्र बनाने और मशीन संचालकों व ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।


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आखिर सुप्रीम कोर्ट ने इतनी सख्ती क्यों दिखाई?
सुप्रीम कोर्ट में चंबल अभयारण्य में लगातार हो रहे अवैध रेत खनन का मामला पहुंचा था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि बार-बार चेतावनी के बावजूद अवैध खनन पूरी तरह नहीं रुका। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरणीय शासन कोई ऐसी व्यवस्था नहीं हो सकती, जो केवल अदालत के हस्तक्षेप के बाद ही सक्रिय हो। अदालत ने टिप्पणी की कि राज्यों और सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे पहले से खतरे को समझें और पर्यावरण को नुकसान से बचाएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि चंबल जैसे संवेदनशील क्षेत्र केवल कागजों में सुरक्षित नहीं रह सकते।
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क्या हैं अदालत के बड़े निर्देश?
  • चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए।
  • संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
  • निगरानी के लिए अलग कंट्रोल रूम बनाया जाए।
  • अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों और वाहनों को जब्त किया जाए।
  • ठेकेदारों और मशीन संचालकों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
  • नियमित निरीक्षण और मॉनिटरिंग की व्यवस्था बनाई जाए।
  • पर्यावरण संरक्षण को केवल अदालत के आदेश तक सीमित न रखा जाए।
  • राज्यों की एजेंसियां पहले से खतरे का आकलन करें।
  • घड़ियाल और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक क्षेत्र को सुरक्षित रखा जाए।
  • उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकारें मिलकर संयुक्त कार्रवाई करें।

चंबल अभयारण्य क्यों है इतना अहम?
राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य देश के सबसे संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों में माना जाता है। यह इलाका घड़ियाल, डॉल्फिन और कई दुर्लभ प्रजातियों का प्राकृतिक घर है। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि अवैध रेत खनन से नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। इससे जलजीवों के प्रजनन क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं और नदी का बहाव भी बदल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी खतरे को गंभीर मानते हुए कहा कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर तुरंत रोक जरूरी है।

क्या सिर्फ कार्रवाई से रुकेगा अवैध खनन?
अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि कई बार प्रशासनिक कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित रह जाती है। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को स्थायी नीति बनाना होगा। अगर सरकारें समय रहते सख्त कदम नहीं उठातीं, तो आने वाले समय में प्राकृतिक संसाधनों को बड़ा नुकसान होगा। अदालत ने राज्यों से जवाबदेही तय करने और अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट करने को भी कहा है। इससे साफ संकेत मिला है कि अब लापरवाही पर अदालत सख्त रुख अपनाएगी।

पर्यावरण और विकास के बीच कैसे बने संतुलन?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं। अदालत ने माना कि निर्माण कार्यों के लिए रेत की जरूरत होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि नदियों और अभयारण्यों को बर्बाद कर दिया जाए। कोर्ट ने राज्यों को टिकाऊ और वैज्ञानिक तरीके से खनन नीति लागू करने की सलाह दी। अदालत की इस सख्ती को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा संदेश माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में अन्य राज्यों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
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