TMC: ' पहले इस्तीफा दें फिर भाजपा के टिकट पर लड़ें चुनाव', महुआ मोइत्रा ने 19 बागी सांसदों पर साधा निशाना
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि संविधान में अलग संसदीय गुट बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह पहले इस्तीफा दें फिर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ें।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि संविधान में अलग संसदीय गुट बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह पहले इस्तीफा दें फिर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ें।
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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने शुक्रवार को पार्टी के बागी सांसदों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि वह संविधान की गलत व्याख्या कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने संसद में एक अलग गुट के रूप में मान्यता मांगने का उनके पास कोई कानूनी आधार नहीं हैंं।
टीएमसी सांसद ने क्या लिखा?
एक्स पर साझा की गई एक पोस्ट में मोइत्रा ने लिखा ‘गद्दार टीएमसी सांसदों को कानून का ज्ञान नहीं है। संविधान के 91वें संशोधन 2003 ने विभाजन/अलग गुट बनाने के प्रावधान को हटा दिया है। सांसदों की संख्या मायने नहीं रखती। मूल राजनीतिक दल के दो-तिहाई सदस्यों को किसी अन्य दल में विलय करना होगा। सभी 19 गद्दारों को इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहिए।'
'अलग संसदीय गुट बनाना अधिकार नही'
उनकी यह टिप्पणी टीएमसी के भीतर तेज होती राजनीतिक खींचतान के बीच आई है, जो लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग करने वाले 19 बागी सांसदों के फैसले के बाद पैदा हुई है। इस कदम ने पार्टी में विभाजन और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ संभावित गठबंधन की अटकलों को हवा दी है। मोइत्रा ने इस मुद्दे को पहली बार उठाने के कुछ दिनों बाद अपने कानूनी तर्क को दोहराते हुए दावा किया कि भले ही विद्रोही खेमे को टीएमसी सांसदों के दो-तिहाई का समर्थन मिल जाए, फिर भी उसे एक अलग संसदीय समूह के रूप में कार्य करने का अधिकार नहीं होगा।
उन्होंने पहले एक पोस्ट में कहा था, 'अगर गद्दारों को 19 सांसद (2/3) मिल भी जाते हैं, जो उन्हें नहीं मिले हैं, तो एकमात्र विकल्प यही है कि वह अपने 2/3 राजनीतिक दल के साथ भाजपा में विलय कर लें। भूपिंदर यादव और लोकसभा अध्यक्ष अलग राजनीतिक दल या गुट नहीं बना सकते।'
क्या है पूरा मामला?
पूर्व टीएमसी नेता ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने 19 लोकसभा सांसदों और 64 विधायकों के समर्थन का दावा किया है। 18 मई को इस गुट ने लोकसभा अध्यक्ष को 19 सांसदों के नाम सौंपकर संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की।इस सूची में काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदर, शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार मल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सायोनी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया और पार्थ भौमिक शामिल हैं।
बंगाल में गरमाई सियासत
राज्यसभा सांसदों सुष्मिता देव, सुखेन्दु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक के इस महीने की शुरुआत में इस्तीफे के बाद से उथल-पुथल और गहरी हो गई है। टीएमसी के बागी सांसदों और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव समेत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई मुलाकातों की खबरों ने संभावित राजनीतिक पुनर्गठन को लेकर अटकलों को और तेज कर दिया है। हालांकि, अभी तक किसी औपचारिक विलय की घोषणा नहीं की गई है।
इस तरह के किसी भी कदम के लिए संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल विरोधी कानून का अनुपालन आवश्यक होगा, जो किसी भी विभाजन को मान्यता देने के लिए दो-तिहाई बहुमत अनिवार्य करता है।यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पार्टी के भीतर बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में सामने आए हैं, जिसमें पार्टी नेतृत्व और बागी विधायक संगठन की भविष्य की दिशा को लेकर तेजी से मतभेद में हैं।