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पश्चिम बंगाल: 'अवैध विदेशी नागरिकों के लिए बनाएं होल्डिंग सेंटर', सरकार ने जिला मजिस्ट्रेटों को दिए निर्देश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 24 May 2026 03:28 PM IST
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सार
पश्चिम बंगाल सरकार ने सभी जिलों को अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों के लिए अस्थायी हिरासत केंद्र बनाने के निर्देश दिए हैं। इन केंद्रों में पकड़े गए विदेशी नागरिकों और जेल से रिहा हुए उन विदेशी कैदियों को रखा जाएगा। पढ़िए रिपोर्ट-
शुभेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
पश्चिम बंगाल के गृह और पर्वतीय मामले विभाग ने सभी जिला अधिकारियों को पत्र लिखा है। इस पत्र में पकड़े गए विदेशी नागरिकों और जेल से रिहा किए गए ऐसे विदेशी कैदियों के लिए अस्थायी हिरासत केंद्र (होल्डिंग सेंटर) बनाने की बात कही गई है, जो अपने वापस अपने देश भेजे जाने का इंतजार कर रहे हैं।
इसमें कहा गया, इस देश में गैरकानूनी रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया के संबंध में यह पत्र लिखा गया है। इस सिलसिले में अनुरोध किया जाता है कि पकड़े गए विदेशी नागरिकों और रिहा किए गए विदेशी कैदियों, जो निर्वासन या अपने देश भेजे जाने का इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए जिले में अस्थायी हिरासत केंद्र बनाने के लिए पहल और उचित कार्रवाई की जाए।
23 मई 2026 को जारी इस निर्देश में कहा गया है कि बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया गृह मंत्रालय के तय नियमों के अनुसार पूरी की जाए। इससे पहले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य पुलिस के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि पकड़े गए बांग्लादेशी घुसपैठियों को अदालत में पेश करने के बजाय सीधे सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ को सौंपा जाए।
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भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम शुरू
इधर, सिलीगुड़ी उपखंड के फांसीदेवा इलाके में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम भी शुरू हो गया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने सीमा सुरक्षा बल को 27 किलोमीटर जमीन सौंप दी है, जिसे सीमा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सीमा क्षेत्र से सामने आए दृश्यों में बाड़ लगाने का काम दिखाई दिया। लंबे समय से लंबित जमीन हस्तांतरण के बाद अधिकारी अब जमीनी तैयारी में जुट गए हैं। माना जा रहा है कि इससे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
स्थानीय लोगों ने इस कदम पर राहत जताते हुए कहा कि लंबे समय से इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई थी। स्थानीय निवासी अनिल घोष ने कहा, यह सीमा क्षेत्र है, जहां पहले सुरक्षा नहीं थी। यहां का माहौल इतना खराब था कि उसे बयां नहीं किया जा सकता। पहले हम यहां गाय भी नहीं पाल सकते थे। गाय पालना मतलब खुद को बांग्लादेशियों और रोहिंग्या लोगों के हवाले करना था। यह केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं, पूरे देश की सुरक्षा का मामला था। आज हमें लगता है कि नई सरकार और नए मुख्यमंत्री के प्रयासों से हम सुरक्षित हैं।
इसमें कहा गया, इस देश में गैरकानूनी रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया के संबंध में यह पत्र लिखा गया है। इस सिलसिले में अनुरोध किया जाता है कि पकड़े गए विदेशी नागरिकों और रिहा किए गए विदेशी कैदियों, जो निर्वासन या अपने देश भेजे जाने का इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए जिले में अस्थायी हिरासत केंद्र बनाने के लिए पहल और उचित कार्रवाई की जाए।
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23 मई 2026 को जारी इस निर्देश में कहा गया है कि बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया गृह मंत्रालय के तय नियमों के अनुसार पूरी की जाए। इससे पहले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य पुलिस के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि पकड़े गए बांग्लादेशी घुसपैठियों को अदालत में पेश करने के बजाय सीधे सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ को सौंपा जाए।
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इधर, सिलीगुड़ी उपखंड के फांसीदेवा इलाके में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम भी शुरू हो गया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने सीमा सुरक्षा बल को 27 किलोमीटर जमीन सौंप दी है, जिसे सीमा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सीमा क्षेत्र से सामने आए दृश्यों में बाड़ लगाने का काम दिखाई दिया। लंबे समय से लंबित जमीन हस्तांतरण के बाद अधिकारी अब जमीनी तैयारी में जुट गए हैं। माना जा रहा है कि इससे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
स्थानीय लोगों ने इस कदम पर राहत जताते हुए कहा कि लंबे समय से इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई थी। स्थानीय निवासी अनिल घोष ने कहा, यह सीमा क्षेत्र है, जहां पहले सुरक्षा नहीं थी। यहां का माहौल इतना खराब था कि उसे बयां नहीं किया जा सकता। पहले हम यहां गाय भी नहीं पाल सकते थे। गाय पालना मतलब खुद को बांग्लादेशियों और रोहिंग्या लोगों के हवाले करना था। यह केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं, पूरे देश की सुरक्षा का मामला था। आज हमें लगता है कि नई सरकार और नए मुख्यमंत्री के प्रयासों से हम सुरक्षित हैं।