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अचानक आया ये नियम, कई दावेदार चुनाव से पहले हुए चित्त
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 20 Aug 2017 04:45 PM IST
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- फोटो : फाइल फोटो
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राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनावों को लेकर घमासान शुरू हो चुके हैं। घमासान के दौर में विवि का नया नियम अब छात्र संगठनों पर भारी पड़ रहा है।
दरअसल नए नियम के मुताबिक एक यूनिवर्सिटी से यूजी कर दूसरे युनिवर्सिटी से पीजी करने वाला स्टूडेंट छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ सकता। रविवार हुई सिंडिकेट की बैठक में सरकार के इस नियम पर मोहर भी लगा दी गई। इस नियम का सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाले छात्र संगठन एनएसयूआई ने जमकर विरोध किया। विरोध के लिए एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष फिरोज खान भी यूनिवर्सिटी पहुंच गए।
प्रतिनिधिमंडल ने वीसी से मुलाकात कर अपनी बात रखी। उन्होंने एक दिन का समय दिया और कहा कि यदि नियम लागू किया गया तो जमकर विरोध प्रदर्शन होगा। इस नियम के लागू होने के बाद एनएसयूआई के मुख्य दावेदार अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर हो जाएंगे। एनएसयूआई ने आरोप भी लगाया कि सरकार की ओर से यह नियम चुनाव के ठीक पहले एबीवीपी को फायदा पहुंचाने व एनएसयूआई को टारगेट करने के उद्देश्य से किया गया है।
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दरअसल नए नियम के मुताबिक एक यूनिवर्सिटी से यूजी कर दूसरे युनिवर्सिटी से पीजी करने वाला स्टूडेंट छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ सकता। रविवार हुई सिंडिकेट की बैठक में सरकार के इस नियम पर मोहर भी लगा दी गई। इस नियम का सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाले छात्र संगठन एनएसयूआई ने जमकर विरोध किया। विरोध के लिए एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष फिरोज खान भी यूनिवर्सिटी पहुंच गए।
प्रतिनिधिमंडल ने वीसी से मुलाकात कर अपनी बात रखी। उन्होंने एक दिन का समय दिया और कहा कि यदि नियम लागू किया गया तो जमकर विरोध प्रदर्शन होगा। इस नियम के लागू होने के बाद एनएसयूआई के मुख्य दावेदार अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर हो जाएंगे। एनएसयूआई ने आरोप भी लगाया कि सरकार की ओर से यह नियम चुनाव के ठीक पहले एबीवीपी को फायदा पहुंचाने व एनएसयूआई को टारगेट करने के उद्देश्य से किया गया है।
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