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छात्रसंघ चुनाव लड़ने वालों को राहत, अब नए स्टूडेंट भी आजमा सकेंगे भाग्य
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 21 Aug 2017 07:07 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट मुख्य पीठ जोधपुर ने छात्रसंघ चुनावों के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को स्वीकार करते हुए नए नियमों के बिंदु सात पर अंतरिम रोक लगाई है। साथ ही, आवेदनों को स्वीकार करने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट जस्टिस निर्मलजीत कौर ने ये आदेश दिए। हाईकोर्ट ने कांता ग्वाला व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एमएस सिंघवी, अखिलेख राजपुरोहित व महावीर सिंह ने बताया कि सरकार ने छात्रसंघ चुनाव को लेकर 24 जुलाई को गाइडलाइन जारी की थी। उसके बाद 17 अगस्त को छात्रसंघ चुनाव की अधिसूचना जारी की गई। इसमें नियमों के बिंदु संख्या सात को क्लेरीफाई करते हुए कहा गया कि जो अपेक्स पोस्ट के लिए चुनाव लड़ना चाहता है वह एक साल से कॉलेज का विद्यार्थी होना आवश्यक है।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने बताया कि जिस दिन चुनाव की अधिसूचना जारी की उसी दिन यह क्लेरीफाई किया गया है जो विधि सम्मत नहीं था। सरकार को 24 जुलाई को ही इस सम्बंध में क्लेरीफाई करना था, जबकि ऐसा नहीं किया गया। ऐसे में तो कई प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के आवेदन चुनाव के लिए स्वीकार करने के निर्देश दिए हैं।
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वहीं, एएजी राजेश पंवार ने बताया कि यह पूरे प्रदेश के लिए निर्देश दिए गए हैं। अब जो भी छात्र चुनाव लड़ना चाहते थे और एक साल पहले से कॉलेज के छात्र नहीं थे उनको अब राहत मिली है।
राजस्थान हाईकोर्ट जस्टिस निर्मलजीत कौर ने ये आदेश दिए। हाईकोर्ट ने कांता ग्वाला व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एमएस सिंघवी, अखिलेख राजपुरोहित व महावीर सिंह ने बताया कि सरकार ने छात्रसंघ चुनाव को लेकर 24 जुलाई को गाइडलाइन जारी की थी। उसके बाद 17 अगस्त को छात्रसंघ चुनाव की अधिसूचना जारी की गई। इसमें नियमों के बिंदु संख्या सात को क्लेरीफाई करते हुए कहा गया कि जो अपेक्स पोस्ट के लिए चुनाव लड़ना चाहता है वह एक साल से कॉलेज का विद्यार्थी होना आवश्यक है।
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याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने बताया कि जिस दिन चुनाव की अधिसूचना जारी की उसी दिन यह क्लेरीफाई किया गया है जो विधि सम्मत नहीं था। सरकार को 24 जुलाई को ही इस सम्बंध में क्लेरीफाई करना था, जबकि ऐसा नहीं किया गया। ऐसे में तो कई प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के आवेदन चुनाव के लिए स्वीकार करने के निर्देश दिए हैं।
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