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अगर आप घर बनवा रहे हैं तो ये खबर जरूर पढ़ें
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 23 Sep 2014 10:32 PM IST
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मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कहर से बढ़ीं मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। वर्तमान में लोगों को भवन निर्माण सामग्री के लिए आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ आने के बाद से रेत, बजरी और पत्थर के दाम बढ़ गए हैं। इसकी वजह से लोगों की आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि तवी, बिलोल और निक्की तवी में आई बाढ़ के बाद से भवन निर्माण सामग्री की मांग बढ़ गई है। वहीं अभी नदियों से रेत, बजरी और पत्थर कम आ रहे हैं। इसकी वजह से इनके दाम बढ़ गए हैं। अधिकतर ट्रैक्टर, टिप्पर चालक इन दिनो तवी, बिलोल आदि में नहीं जा रहे। इनका कहना है कि अधिक पानी आने के कारण कई स्थानों पर दलदल की स्थिति है।
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ऐसे में ट्रैक्टर, ट्राली लेकर रेत, बजरी लाना खतरे से खाली नहीं है। दूसरी ओर वहां पर अभी न तो पत्थर मिल रहे हैं न ही बजरी और रेत। इसकी वजह से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत कराने के लिए लोगों को महंगे दामों पर सामग्री लेना मजबूरी बन गई है।
स्थानीय अशोक चौधरी, दीपक कुमार, श्रवण लाल, बृज भूषण का कहना है कि जिन लोगों के बारिश और बाढ़ के चलते मकान ढह गए थे, उन्हें भवन निर्माण कराने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। एक तो जल्दी सामग्री नहीं मिल रही, जहां मिल रही वहां ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही।
बाढ़ आने से पहले बजरी की ट्राली की कीमत 2000 रुपये थी, वर्तमान में यह 3000 रुपये तक पहुंच गई है। इसी तरह पत्थर की ट्राली की कीमत 1500 से बढ़कर 2300 तक पर पहुंच गई। रेत की ट्राली भी जो पहले 1000 रुपये में मिलती थी, वर्तमान में 1200 रुपये तक में मिल रही है।
इस संबंध में रेत, बजरी का कारोबार करने वालों का कहना है कि न तो इस समय लेबर मिल रही है न ही तवी व बिलोल में वाहन चालक आ रहे हैं। इस संबंध में लोगों ने जिलाधीश जम्मू से मांग करते हुए कहा कि तय कीमत के मुताबिक भवन निर्माण सामग्री बेचने के लिए दिशा-निर्देश जारी किया जाए, ताकि लोग अतिरिक्त खर्च से बच सकें।