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Amarnath Yatra: अभेद्य सुरक्षा घेरे में होगी अमरनाथ यात्रा, गृहमंत्री शाह का पैगाम- किसी पर आंच नहीं आने देंगे

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली/जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 13 Jun 2026 06:22 AM IST
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सार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 3 जुलाई से शुरू होने वाली यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय और अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं।

Amarnath Yatra: The pilgrimage will take place under an impenetrable security cover
सर्विलांस सिस्टम, ड्रोन और सीसीटीवी से चप्पे-चप्पे पर नजर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इस बार आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। ड्रोन, सीसीटीवी और सर्विलांस सिस्टम से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 3 जुलाई से शुरू होने वाली यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय और अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं।



शाह ने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ), जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को यात्रा मार्ग व प्रमुख पर्यटन स्थलों पर कड़ी नजर रखनी होगी। तैयारियों की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक में शाह ने कहा कि पारंपरिक सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बनाने के लिए ड्रोन, सीसीटीवी निगरानी, सर्विलांस सिस्टम और अन्य आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जाए।
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गृह मंत्री ने यात्रा से जुड़े स्थानीय लोगों और पशुओं का पंजीकरण करने तथा क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्र जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पंजीकरण, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन सहित सभी आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। 
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बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, गृह सचिव गोविंद मोहन, खुफिया ब्यूरो प्रमुख तपन कुमार डेका, सीआरपीएफ महानिदेशक जीपी सिंह सहित वरिष्ठ सुरक्षा और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।

57 दिनों तक चलेगी यात्रा
57 दिनों तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालु अनंतनाग जिले के पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले के 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग का उपयोग करेंगे।

मौसम देख रवाना किए जाएंगे जत्थे
शाह ने कहा कि सीएपीएफ व जम्मू-कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी यात्रा के दौरान शिविर स्थलों पर व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी करें। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि मौसम की स्थिति और पूर्वानुमान के आधार पर श्रद्धालुओं के जत्थों की आवाजाही संचालित की जाए। उन्होंने यात्रा मार्ग के अलावा प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि श्रद्धालु यात्रा के दौरान पर्यटन स्थलों का भी आनंद ले सकें।

अत्याधुनिक स्क्रीनिंग उपकरण किए जाएंगे तैनात
उपराज्यपाल सिन्हा ने इस सप्ताह की शुरुआत में तैयारियों की समीक्षा की थी। उन्होंने विभिन्न विभागों और सुरक्षा एजेंसियों को बुनियादी ढांचे, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, कनेक्टिविटी और तीर्थयात्री सेवाओं से जुड़ी सुचारू व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अत्याधुनिक जांच स्क्रीनिंग और उपकरण भी तैनात किए हैं। अधिकारियों ने बताया कि इनमें पोर्टेबल आरसीआईईडी जैमर्स, डीप सर्च मेटल डिटेक्टर्स, विस्फोटक और तरल विस्फोटक डिटेक्टर्स, नॉन-लीनियर जंक्शन डिटेक्टर्स (एनएलजेडी) लगाए गए हैं।

साथ ही प्रतिबंधित सामग्री का पता लगाने वाले उपकरण तैनात किए गए हैं। इनके अलावा वाहनों के नीचे जांच करने वाले दर्पण, ऑप्टिकल फाइबरस्कोप, मल्टी-टाइप सीसीटीवी सिस्टम, एक्स-रे बैग स्कैनर (एक्सबिस), वाहनों पर लगे एक्स-रे स्कैनर, मल्टी-जोन डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर्स (डीएफएमडी), हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर्स (एचएचएमडी), सर्च मेटल डिटेक्टर्स और अन्य विशेष उपकरण शामिल हैं।

क्यूआर आधारित पहचान एप की शुरुआत
पुलिस ने क्यूआर आधारित पहचान एप की भी शुरुआत की है जिसे यात्रा मार्ग पर काम करने वाले कामगारों और विक्रेताओं की डिजिटल रूप से पहचान सत्यापित करने के लिए बनाया गया है। अधिकारियों ने कहा कि यह प्रणाली असत्यापित व्यक्तियों को तीर्थयात्रा व्यवस्था में घुसने से रोकने में मदद करेगी और साथ ही जवाबदेही और भीड़ प्रबंधन के तरीके को भी बेहतर बनाएगी। किरायेदारों के सत्यापन अभियान, ठहरने की जगहों की जांच और खुफिया जानकारी जुटाने के काम भी तेज कर दिए गए हैं।

सीआरपीएफ डीजी ने किया घाटी का दौरा
सीआरपीएफ महानिदेशक (डीजी) जीपी सिंह ने भी घाटी का दौरा किया और बालटाल जाने वाले रास्ते पर सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया, साथ ही कमांडरों को सक्रिय कदम उठाने के निर्देश दिए। हिमालय पर्वतमाला में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस गुफा मंदिर की 57 दिन की तीर्थयात्रा के लिए भारी सुरक्षा इंतजाम की जरूरत होती है जिसमें केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश की एजेंसियां मिलकर काम करती हैं।

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