सोनम वांगचुक ने खुद को बताया 'ऑनरेरी कॉकरोच': LG के दावों को किया खारिज, कहा-असहमति से सरकारें असुरक्षित न हों
सोनम वांगचुक ने लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के उन दावों को खारिज किया है, जिनमें उनकी मुलाकात और 'कॉकरोच जनता पार्टी' को लेकर टिप्पणी की गई थी। वांगचुक ने कहा कि बैठक सौहार्दपूर्ण थी और वह आज भी खुद को 'ऑनरेरी कॉकरोच' मानते हैं तथा अपने बयान पर कायम हैं।
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सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। इनमें उनके ऑनलाइन आंदोलन 'कॉकरोच जनता पार्टी' को लेकर दिए गए बयानों का उल्लेख किया गया था। वांगचुक ने कहा कि वह आज भी इस समूह का समर्थन करते हैं और खुद को गर्व से 'ऑनरेरी कॉकरोच' मानते हैं।
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब एलजी सक्सेना ने वांगचुक और उनकी पत्नी तथा हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख की सह-संस्थापक गीतांजलि जे अंगमो से हुई मुलाकात के बाद एक्स पर एक पोस्ट किया।
MY CLARIFICATION...
to statements made by Lieutenant Governor of Ladakh regarding his warning to me to refrain from making comments on #CockroachJantaPartyविज्ञापन Trending Videos
The meeting and the LG's tweet happened on 26th evening, yet I avoided reacting to the post that evening. But next morning… pic.twitter.com/dMiAco5lHy— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) May 28, 2026
पोस्ट में एलजी ने दावा किया कि उन्होंने वांगचुक को 'भ्रामक और भड़काऊ नैरेटिव गढ़ने' के खिलाफ चेताया था तथा कहा था कि लद्दाख की तुलना मणिपुर से करना 'निर्णय की भूल' थी। एलजी सक्सेना ने यह भी आरोप लगाया कि वांगचुक 'कॉकरोच जनता पार्टी' की उत्पत्ति को लेकर आश्वस्त नहीं थे और इसके संस्थापकों की मंशा समझने के बाद अपने समर्थन पर पुनर्विचार करेंगे।
इन दावों को खारिज करते हुए वांगचुक ने मुलाकात को सौहार्दपूर्ण और मित्रतापूर्ण बताया तथा कहा कि एलजी की सार्वजनिक टिप्पणियों का लहजा बैठक से बिल्कुल अलग था। वांगचुक ने कहा, उपराज्यपाल ने हमें चाय पर आमंत्रित किया था और लगभग एक घंटे तक हमने उनके प्रयासों, हमारे काम और संभावित सहयोग पर गर्मजोशी के माहौल में चर्चा की। बातचीत के दौरान किसी प्रकार की चेतावनी, फटकार या टकराव नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बैठक समाप्त होने के तुरंत बाद एलजी का पोस्ट देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ।
वांगचुक ने कहा, हमारे निकलने के एक घंटे बाद ऐसा ट्वीट सामने आया, मानो हमें चेतावनी दी गई हो या फटकार लगाई गई हो जबकि बैठक का माहौल बिल्कुल वैसा नहीं था। उन्होंने संकेत दिया कि सार्वजनिक बयानबाजी शायद दिल्ली में बैठे किसी बड़े अधिकारी को खुश करने के लिए की गई हो।
लद्दाख और मणिपुर की तुलना को लेकर उठे विवाद पर वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी इसे निर्णय की भूल नहीं कहा।उन्होंने कहा, मैं आज भी उस तुलना पर कायम हूं। मैंने सिर्फ इतना कहा था कि मौजूदा परिस्थितियों में उस उदाहरण का इस्तेमाल टाला जा सकता था। टाला जाना और निर्णय की भूल होना दोनों अलग बातें हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत पहले हिरासत में लिए जा चुके वांगचुक ने यह भी खारिज किया कि उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी से दूरी बनाई है। वांगचुक के अनुसार बैठक के दौरान एलजी सक्सेना ने आरोप लगाया कि यह ऑनलाइन आंदोलन विदेशी शक्तियों से प्रभावित है और इसे सोरोस फाउंडेशन, पाकिस्तान तथा बांग्लादेश जैसी संस्थाओं से समर्थन मिल रहा है। हालांकि वांगचुक ने कहा कि उन्होंने इन आरोपों को न तो स्वीकार किया और न ही समर्थन दिया।
उन्होंने कहा, मैंने कभी नहीं कहा कि मैं संगठन की उत्पत्ति को लेकर असमंजस में हूं या अपने रुख पर पुनर्विचार करूंगा। चर्चा को याद करते हुए वांगचुक ने कहा कि अपने ही अनुभवों को देखते हुए उन्हें ये आरोप विडंबनापूर्ण लगे।
उन्होंने कहा, मैं मन ही मन इस कहानी पर हंस रहा था क्योंकि यही बातें मेरे खिलाफ भी कही गई थीं जब मुझे जेल में डाला गया था। वांगचुक ने कहा कि सरकारों को ऑनलाइन असहमति से असुरक्षित महसूस नहीं करना चाहिए बल्कि लोगों की चिंताओं के साथ रचनात्मक संवाद करना चाहिए। उन्होंने कहा, मैं कॉकरोच पार्टी का बड़ा प्रशंसक हूं और आज भी हूं। मैं अपने इस बयान पर कायम हूं कि मैं एक ऑनरेरी कॉकरोच हूं।
पार्टी में 70 फीसदी लोग भारत से तो बड़ा प्रशंसक
मैग्सेसे पुरस्कार विजेता वांगचुक ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत डिपके, जिन्हें उन्होंने “कॉकरोच-इन-चीफ” कहा, से अपील की कि वे विदेशी फंडिंग के आरोपों का जवाब देने के लिए सार्वजनिक रूप से ऑडियंस डेटा जारी करें। डिपके ने पहले एक्स पर एनालिटिक्स साझा करते हुए दावा किया था कि प्लेटफॉर्म की 94 प्रतिशत से अधिक ऑडियंस भारत से है और विदेशी समर्थन के आरोपों को खारिज किया था। वांगचुक ने कहा, अगर यह भारतीय युवाओं की पहल है जिसे दुनिया भर से समर्थन मिल रहा है तो मैं इसका और बड़ा प्रशंसक बन जाता हूं। यदि 70 प्रतिशत लोग भारत से हैं और बाकी दुनिया के अलग-अलग देशों में फैले हैं तो यह लोकतांत्रिक विरोध की भारतीय रचनात्मकता को दर्शाता है। अपने पहले पोस्ट में एलजी सक्सेना ने कहा था कि दोनों पक्षों ने लद्दाख में सकारात्मक माहौल बनाए रखने पर सहमति जताई है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि बड़े स्तर के विरोध-प्रदर्शन पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। यह घटनाक्रम लद्दाख प्रतिनिधियों और गृह मंत्रालय की एक उपसमिति के बीच हाल ही में हुई वार्ता के बाद सामने आया है। हालिया साक्षात्कारों में वांगचुक ने आशंका जताई थी कि लद्दाख भी मणिपुर जैसी परिस्थितियों की ओर बढ़ सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि हाल की बातचीत से माहौल में सुधार आया है।