हम से ये बार-ए-लुत्फ़ उठाया न जाएगा
एहसां ये कीजिए कि ये एहसां न कीजिए
- हफ़ीज़ जालंधर
मैं कश्ती में अकेला तो नहीं हूं
मिरे हमराह दरिया जा रहा है
- अहमद नदीम क़ासमी
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